

टाटा वर्कर्स यूनियन में फंड और खातों को लेकर विवाद गहराया, अध्यक्ष कोषाध्यक्ष ने दिया अल्टीमेटम
जमशेदपुर: टाटा स्टील की अधिकृत यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन (TWU) में इन दिनों अंदरूनी कलह और वित्तीय मामलों को लेकर घमासान मचा हुआ है। यूनियन के फंड के इस्तेमाल और खातों के संचालन को लेकर विवाद अब इस हद तक बढ़ गया है कि शीर्ष पदाधिकारियों के बीच दूरियां साफ तौर पर देखी जा सकती हैं। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब यूनियन के कोषाध्यक्ष सह अकाउंटेंट आमोद कुमार दुबे ने सीधे तौर पर अध्यक्ष को कड़े शब्दों में पत्र लिखकर अल्टीमेटम जारी कर दिया। इस घटनाक्रम से जमशेदपुर के औद्योगिक और मजदूर गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, कोषाध्यक्ष आमोद कुमार दुबे ने मंगलवार को यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नू को एक कड़ा पत्र सौंपा। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने तत्काल प्रभाव से कमेटी की बैठक बुलाने और पिछले चार महीने से लंबित पड़े खातों की समीक्षा कराने की मांग की है। कोषाध्यक्ष का साफ कहना है कि यूनियन के भीतर वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है और इस तरह की देरी से संगठन की छवि पर सवालिया निशान खड़े होते हैं। मजदूर यूनियन के कामकाज पर अधिक जानकारी के लिए आप टाटा स्टील की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।
चार महीने से लंबित हैं खाते और नहीं हुई कमेटी की बैठक
कोषाध्यक्ष द्वारा उठाए गए इस गंभीर कदम के पीछे लंबे समय से चल रही अनदेखी मुख्य वजह बताई जा रही है। पत्र में कड़े आरोप लगाए गए हैं कि पिछले चार महीने से यूनियन का हिसाब-किताब लंबित चल रहा है। इस संबंध में व्हाट्सएप के माध्यम से अध्यक्ष समेत यूनियन के अन्य सभी पदाधिकारियों को पहले ही अवगत कराया जा चुका था, लेकिन इसके बावजूद किसी भी प्रकार की सकारात्मक पहल नहीं की गई।
यूनियन के संविधान के नियमों का हवाला देते हुए कोषाध्यक्ष ने याद दिलाया है कि प्रावधानों के मुताबिक प्रत्येक दो महीने में कमेटी की बैठक बुलाना अनिवार्य होता है। इस बैठक में वित्तीय खातों को कार्यकारिणी से पारित कराना होता है, ताकि हर एक पाई का हिसाब स्पष्ट रहे। लेकिन विडंबना यह है कि लंबे समय से इस नियम की अनदेखी की जा रही है, जिससे नाराज होकर कोषाध्यक्ष को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है।
बैंक खाते फ्रीज करने की दी गई कड़ी चेतावनी
मामला तब और तूल पकड़ गया जब कोषाध्यक्ष ने अपनी चेतावनी में यहां तक कह दिया कि यदि जल्द से जल्द बैठक नहीं बुलाई गई और खातों की समीक्षा कर उन्हें मंजूरी नहीं दी गई, तो उन्हें मजबूरन एक कड़ा कदम उठाना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे यूनियन के बैंक खातों का संचालन रोकने यानी ऑपरेशन फ्रीज कराने के लिए बाध्य हो जाएंगे।
कोषाध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि आने वाले दिनों में ऐसी कोई भी वित्तीय या प्रशासनिक संकट की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसके लिए सीधे तौर पर अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नू की जिम्मेदारी तय होगी। इस अल्टीमेटम के बाद से यूनियन दफ्तर से लेकर मैदान तक चर्चाओं का बाजार गर्म है।
अन्य प्रमुख पदाधिकारियों को भी भेजी गई है पत्र की प्रतिलिपि
इस पूरे घटनाक्रम को केवल मौखिक या तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि आधिकारिक रूप से इसकी गूंज शीर्ष स्तर तक पहुंचाई गई है। कोषाध्यक्ष द्वारा लिखे गए इस तीखे पत्र की प्रतिलिपि डिप्टी प्रेसिडेंट सह फाइनेंस सब-कमेटी के चेयरमैन और जनरल सेक्रेटरी को भी सूचार्थ प्रेषित कर दी गई है ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें।
हालांकि, इस भारी विवाद और गंभीर आरोपों के सामने आने के बावजूद अब तक अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नू या अन्य किसी भी प्रमुख पदाधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मजदूर वर्ग और आम सदस्यों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस आंतरिक विवाद का क्या नतीजा निकलता है और क्या यूनियन नेतृत्व समय रहते इस आग को बुझाने में कामयाब हो पाता है या नहीं।

