बेटियों की सुरक्षा पर सख्ती स्वागतयोग्य, अब जमीन पर दिखे असर अमन कुमार शांडिल्य
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर के नए वरीय पुलिस अधीक्षक डॉ. एहतेशाम वकारिब ने महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराधों को लेकर जो स्पष्ट और सख्त संदेश दिया है, वह न केवल समय की आवश्यकता है बल्कि समाज के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। दुष्कर्म, छेड़छाड़ और पॉक्सो अधिनियम के मामलों में 60 दिनों के भीतर अनुसंधान पूरा कर चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश पुलिस की जवाबदेही बढ़ाने वाला निर्णय है।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में अक्सर जांच में देरी, साक्ष्यों के कमजोर होने और न्याय मिलने में लंबा समय लगने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में समयबद्ध जांच और त्वरित आरोप-पत्र की व्यवस्था पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने के साथ-साथ अपराधियों में कानून का भय भी पैदा करेगी। यह संदेश भी स्पष्ट है कि महिलाओं की सुरक्षा के मामलों में अब किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
हालांकि केवल निर्देश जारी कर देना पर्याप्त नहीं होगा। इन आदेशों का प्रभाव तभी दिखाई देगा जब हर थाना स्तर पर इनका ईमानदारी से पालन हो, अनुसंधान की गुणवत्ता बनी रहे, पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए और दोषियों को अदालत से समय पर सजा दिलाने की दिशा में प्रभावी पैरवी हो।
थानों में आने वाले प्रत्येक नागरिक की शिकायत को गंभीरता से सुनने और त्वरित समाधान देने का निर्देश भी सराहनीय है। पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत होगा तो अपराधों की रिपोर्टिंग बढ़ेगी और अपराध नियंत्रण भी अधिक प्रभावी होगा।
बेटियों की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। पुलिस की सख्ती के साथ परिवार, विद्यालय, सामाजिक संस्थाएं और आम नागरिक भी जागरूक और जिम्मेदार बनें, तभी महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण का निर्माण संभव होगा। यदि नए एसएसपी के निर्देश कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर पूरी सख्ती से लागू होते हैं, तो यह जमशेदपुर में कानून के राज और महिला सुरक्षा के लिए एक सकारात्मक बदलाव साबित हो सकता है।

