20 साल से एक ही पद पर जमे सुरोजित दास पर गंभीर आरोप, CMD कार्यालय की छवि पर संकट
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा। यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) के CMD कार्यालय में निजी सहायक के पद पर पिछले 20 वर्षों से जमे सुरोजित दास पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, अधिकारियों को डराने-धमकाने और जांच को प्रभावित करने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।

सूत्रों के अनुसार, सुरोजित दास की कार्यशैली को लेकर विभागीय असंतोष गहराता जा रहा है। परमाणु ऊर्जा विभाग और प्रधानमंत्री कार्यालय तक कई शिकायतें पहुंची हैं, जिसमें कहा गया है कि दास की वजह से CMD कार्यालय की साख प्रभावित हो रही है। गोपनीय दस्तावेजों का लीक होना, अधिकारियों का तबादला कराना और प्रभाव का दुरुपयोग—ऐसे कई आरोपों में सुरोजित दास घिरे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि दास एक निजी सहायक होते हुए भी पूरे कार्यालय पर हावी रहते हैं।

गंभीर सवाल तब उठे जब यह जानकारी सामने आई कि उनके भाई गोपीनाथ दास पर 56 लाख के टीए-डीए घोटाले में सीबीआई जांच चल रही है, और सुरोजित दास उस जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, यूसीआईएल के एक कर्मचारी के घर में घुसकर मारपीट करने का भी आरोप सुरोजित दास पर है, जिसकी शिकायत जादूगोड़ा थाना में दर्ज है। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से मामला शांत कराया गया।

संयुक्त यूनियन से जुड़े नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं कि एक ही व्यक्ति 20 वर्षों से एक संवेदनशील पद पर कैसे बना हुआ है। पूर्व डीएफ देवाशीष घोष और सामाजिक संगठन झारखंड क्रांतिकारी लोकतांत्रिक मोर्चा के राजा कलंदी ने सुरोजित दास पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगाते हुए विजिलेंस और सीबीआई से जांच की मांग की है।

अब सवाल उठता है कि इतने संगीन आरोपों के बावजूद दास को बचाने में कौन-से शक्तिशाली हाथ लगे हैं? और CMD कार्यालय की छवि को क्यों दांव पर लगाया जा रहा है? अधिकारियों और कर्मचारियों को उम्मीद है कि जल्द कार्रवाई होगी, और सुरोजित दास को संवेदनशील पद से हटाकर संगठन की प्रतिष्ठा को बचाया जाएगा।


