सरायकेला डीसी ने खोली पोल: सरकारी अस्पताल गम्हरिया की बदहाली पर फूटा गुस्सा
मृत्युंजय बर्मन
सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन गुरुवार को सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी नीतीश कुमार सिंह ने जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गम्हरिया का औचक निरीक्षण किया तो अस्पताल की तस्वीर देखकर उनकी खीज भी खुलकर सामने आ गई। यह निरीक्षण विशेष रूप से सरकारी अस्पताल गम्हरिया की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है, जहाँ मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में गंभीर कमियाँ पाई गईं, जिससे आम जनता के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
उपायुक्त का औचक निरीक्षण और सरकारी अस्पताल गम्हरिया की चौंकाने वाली तस्वीर
उपायुक्त ने ओपीडी, पुरुष वार्ड, महिला वार्ड, प्रसूति कक्ष, दवा भंडारण कक्ष समेत विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि पुरुष और महिला दोनों वार्ड पूरी तरह खाली मिले। किसी भी वार्ड में एक भी मरीज भर्ती नहीं था। इस पर उपायुक्त ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से कड़ी नाराजगी जताते हुए पूछा कि जब निजी अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं, तब सरकारी अस्पताल के वार्ड आखिर खाली क्यों हैं? यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा कम हो रहा है, जिसकी वजह से निजी अस्पतालों पर निर्भरता बढ़ रही है।
ताला लगा वार्ड और चाबी का इंतजार
उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। निरीक्षण के दौरान पुरुष वार्ड का ताला बंद मिला और वार्ड के बाहर लगी ग्रिल भी बंद थी। करीब आधे घंटे तक चाबी का इंतजार करना पड़ा। चाबी पहुंचने के बाद ही उपायुक्त वार्ड के भीतर जा सके। निरीक्षण के दौरान मौजूद अधिकारियों के लिए यह दृश्य भी असहज करने वाला रहा कि अस्पताल में मरीजों से पहले ताले और चाबियों की व्यवस्था से जूझना पड़ रहा था। यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि मरीजों के लिए आपातकालीन स्थिति में सेवाओं की अनुपलब्धता का भी संकेत देता है।
चिकित्सा अधिकारी की क्लास और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं का अभाव
अस्पताल की व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उपायुक्त ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से दो टूक कहा, “क्या प्रसव सेवा तक ही डॉक्टर सीमित रहेंगे ? अस्पताल में अन्य मरीजों का इलाज क्यों नहीं हो रहा?” उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पतालों में सभी प्रकार के मरीजों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है। यह सवाल सीधे तौर पर अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल खड़ा करता है, जब वे अपनी प्राथमिक जिम्मेदारियों से भटकते हुए दिखाई देते हैं। उपायुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी सुचारु रूप से चलनी चाहिए।

दवा भंडारण और समग्र कार्यप्रणाली पर असंतोष
उपायुक्त ने औषधि भंडारण कक्ष का भी निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पहले मिली एक्सपायरी दवाओं की शिकायतों में सुधार हुआ है और फिलहाल एक्सपायरी दवाएं हटा दी गई हैं। हालांकि अस्पताल की समग्र कार्यप्रणाली पर उन्होंने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि केवल दवा भंडार सुधार लेने से स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर नहीं मानी जा सकती। दवाएं भले ही एक्सपायरी न हों, लेकिन अगर मरीजों को उनका लाभ ही न मिल पाए तो ऐसी व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
जांच और कार्रवाई के निर्देश
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण में सामने आई सभी कमियों और अनियमितताओं की विस्तृत जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, मरीजों की संख्या बढ़ाने तथा आम लोगों का सरकारी अस्पतालों पर भरोसा लौटाने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। यह एक महत्वपूर्ण कदम है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो और जवाबदेही तय की जा सके। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट पर भी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के महत्व पर जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य केंद्रों में गुणात्मक सुधार की आवश्यकता
उपायुक्त ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की संख्या बढ़ाने के लिए नियमित चिकित्सकों की उपलब्धता, विशेषज्ञ सेवाएं, दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति, स्वच्छता, आवश्यक सुविधाओं का विस्तार और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि नियमित निरीक्षण और जवाबदेही की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा तथा जल्द ही जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में गुणात्मक सुधार देखने को मिलेगा। निरीक्षण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश भी उपस्थित थे। इन निर्देशों का उद्देश्य सिर्फ सरकारी अस्पताल गम्हरिया ही नहीं, बल्कि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में एक नई कार्य संस्कृति स्थापित करना है, जहाँ मरीजो को प्राथमिकता मिले और उन्हें उचित देखभाल प्राप्त हो सके।

