सियासत की बदलती राहों में स्वामी ने फिर बदला पड़ाव! राहुल गांधी से मुलाकात के बाद नई राजनीतिक पारी के संकेत
जेपी गुप्ता, राष्ट्र संवाद संवाददाता लखनऊ। सियासत की राह भी अजब है। यहां मंजिल से ज्यादा मायने रास्ते बदलने के होते हैं। पूर्व काबीना मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक यात्रा का रुख बदला है। कभी हाथी की सवारी कर सत्ता के गलियारों तक पहुंचे स्वामी प्रसाद मौर्य अब कांग्रेस के साथ कदमताल करने को तैयार हैं। नई दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की।
स्वामी प्रसाद मौर्य की राजनीतिक यात्रा कई पड़ावों से होकर गुजरी है। बसपा शासनकाल में उन्होंने हाथी की सवारी की और सत्ता का स्वाद चखा। जब बसपा के सियासी सितारे गर्दिश में आए तो उन्होंने हाथी से उतरकर कमल का फूल खिलाने की राह पकड़ ली। भाजपा से भी राजनीतिक दूरी बढ़ी तो चुनावी मौसम में उन्होंने साइकिल की सवारी कर ली।
उन्हें उम्मीद थी कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा की साइकिल रफ्तार पकड़ेगी और सत्ता की राह फिर लखनऊ तक पहुंचेगी। लेकिन सियासी गणित ने उनका अनुमान उलट दिया। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार दोबारा बनी। इसके बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने सपा से भी किनारा कर अपनी अलग पार्टी बनाई l गठबंधन का मोर्चा खड़ा करने की कोशिश की, लेकिन अपेक्षितसफलता नहीं मिली ।
अब एक बार फिर उन्होंने अपनी सियासी दिशा बदली है। कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने की तैयारी को उनकी राजनीतिक यात्रा में एक नया मोड़ हो सकता है । राहुल गांधी से हुई मुलाकात को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है l
हालांकि राजनीति में किसी निष्कर्ष पर जल्द पहुंचना आसान नहीं होता। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच संभावित गठजोड़ की चर्चाओं के बीच स्वामी प्रसाद मौर्य का कांग्रेस की ओर बढ़ना कई सियासी संकेत देता है। मौजूदा परिस्थितियों में यह कदम उनके लिए सपा से अलग एक नया राजनीतिक विकल्प तलाशने की कोशिश भी है।
सियासत की बिसात पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर अपना मोहरा बदल दिया है। अब देखना यह है कि कांग्रेस का हाथ उनके राजनीतिक सफर को नई दिशा देता है या यह भी उनकी बदलती सियासी यात्राओं का एक और पड़ाव साबित होता है।

