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    Home » नकली पुलिसकर्मियों के नाम पर 6 करोड़ 41 लाख का वेतन घोटाला, मुंबई पुलिस में हड़कंप
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    नकली पुलिसकर्मियों के नाम पर 6 करोड़ 41 लाख का वेतन घोटाला, मुंबई पुलिस में हड़कंप

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 5, 2026No Comments3 Mins Read
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    नकली पुलिसकर्मियों के नाम पर
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता, इंद्र यादव

    जो चोरों को पकड़ने की जिम्मेदारी उठाते हैं, वही अब खुद घोटाले में फंस गए! मुंबई पुलिस में एक ऐसा धमाकेदार घोटाला सामने आया है, जिसने पूरे महाराष्ट्र में खलबली मचा दी है। सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये निकाल लिए गए… और वो भी नकली पुलिसकर्मियों के नाम पर!

    समता नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले में अब कार्रवाई भी शुरू हो गई है। दो कर्मचारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है।

    मुंबई पुलिस के नॉर्थ रीजन में पुराने ‘सेवार्थ’ वेतन सिस्टम से नए सिस्टम में डाटा शिफ्ट करते समय गड़बड़ी पकड़ी गई। दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 और जून से सितंबर 2020 के बीच के वेतन बिलों में भारी अनियमितताएं मिलीं।

    आरोप है कि असली पुलिस कर्मचारी तो दूर, जो लोग पुलिस में कभी थे ही नहीं, उनके नाम पर वेतन निकाले गए। ये ‘घोस्ट एम्प्लॉयीज’ यानी नकली कर्मचारी थे। उनके नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाए गए, वेतन बिल तैयार किए गए और सरकारी पैसे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।

    कुल नुकसान? 6 करोड़ 41 लाख 14 हजार 36 रुपये! इतनी बड़ी रकम सरकारी खजाने से निकल गई।

    समता नगर पुलिस स्टेशन में 5 लोगों के खिलाफ गुनाह दर्ज किया गया है। इनमें शामिल हैं!

    • तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी रामकिशन गोस्वामी
    • नागेश तळवडेकर
    • विजया चव्हाण (तत्कालीन प्रमुख लिपिक)
    • प्रमुख लिपिक अजय राठोड
    • वरिष्ठ लिपिक अमोल मेसराम (या मेमराम)

    इन पर फसवणूक, फर्जी दस्तावेज बनाने और साजिश रचकर वेतन घोटाला करने के आरोप हैं।

    सह-पुलिस आयुक्त (प्रशासन) के आदेश पर विजया चव्हाण और अमोल मेसराम को सेवा से निलंबित कर दिया गया है। जांच पूरी होने तक ये दोनों सस्पेंड रहेंगे। दोनों पर विभागीय कार्रवाई भी शुरू हो गई है।

    नकली कर्मचारियों के नामों में रामदास भोगले, सुधाकर कदम, सरजू यादव, भगवत भोसले, गुणाजी खावकर, महादेव हलदणकर, राजेंद्र सोनार, उत्तम थोरात, सूर्यकांत पाटील और पांडुरंग कदम जैसे नाम सामने आए हैं। इन नामों पर पगार निकाला गया था।

    आंतरिक ऑडिट में ये गड़बड़ी पकड़ी गई। नॉर्थ रीजन के एक पुलिस अधिकारी ने समता नगर थाने में शिकायत दी। जांच में पता चला कि फर्जी वेतन देयक बनाकर सरकारी फंड का दुरुपयोग किया गया। पैसा कहां गया, किन खातों में गया और असल में कौन लोग शामिल थे, इसकी गहरी जांच चल रही है।

    पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है, लेकिन जब खुद सिस्टम के अंदर से घोटाला हो तो भरोसा कैसे रहे? मुंबई पुलिस अब इस मामले को गंभीरता से ले रही है। आगे की जांच में और नाम सामने आ सकते हैं।

    ये सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरी का सबूत है। जांच पूरी होने का इंतजार है… देखना होगा कि बाकी आरोपियों पर क्या कार्रवाई होती है।

    नकली पुलिसकर्मियों के नाम पर कैसे हुआ इतना बड़ा घोटाला

    अधिक जानकारी के लिए मुंबई पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

    इस घोटाले ने पुलिस विभाग की आंतरिक निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नकली पुलिसकर्मियों के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी ने जनता के विश्वास को झकझोर दिया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि जल्द ही सभी दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।

    नकली पुलिसकर्मी महाराष्ट्र मुंबई पुलिस वेतन घोटाला
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