लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर के सदर अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य पर कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, पूर्वी सिंहभूम की ओर से सोमवार को सदर अस्पताल के ओपीडी में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और मानसिक स्वास्थ्य व तनाव से निपटने के उपायों की जानकारी दी। इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के आईईसी पोस्टर का विमोचन भी किया गया।
सदर अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य पर कार्यशाला के मुख्य बिंदु
मनोचिकित्सक डॉ. दीपक कुमार गिरि ने नशापान के विभिन्न तरीकों तथा इससे होने वाली शारीरिक और मानसिक समस्याओं पर प्रकाश डाला। मौके पर एसीएमओ डॉ. अजय कुमार सिन्हा, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. जोगेश्वर प्रसाद, उपाधीक्षक डॉ. कमलेश कुमार प्रसाद सहित चिकित्सक, पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। संचालन रविंद्र नाथ ठाकुर ने किया।
मानसिक स्वास्थ्य का महत्व
आज के दौर में मानसिक तनाव एक गंभीर समस्या बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान न दिया जाए तो यह गंभीर शारीरिक बीमारियों का रूप ले सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य।
कार्यशाला के दौरान यह बताया गया कि तनाव प्रबंधन के लिए योग, ध्यान और सकारात्मक सोच अत्यंत आवश्यक है। नशे की लत न केवल व्यक्ति को शारीरिक रूप से कमजोर करती है, बल्कि उसके मानसिक संतुलन को भी बिगाड़ देती है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनता और स्वास्थ्य कर्मियों को मानसिक रोगों के लक्षणों के प्रति जागरूक करना था ताकि समय पर उपचार शुरू किया जा सके।
सदर अस्पताल के ओपीडी में आयोजित इस सत्र में उपस्थित कर्मचारियों को सलाह दी गई कि वे मरीजों के साथ सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार करें, क्योंकि कई बार मानसिक तनाव का कारण सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियां होती हैं। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि नशे से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।

