जादूगोड़ा में अवैध लॉटरी-नशा गठजोड़ के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता ऋषि कुणु सरांगी ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से इस सिंडिकेट के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने की मांग की है।
अवैध लॉटरी-नशा गठजोड़: गरीबों और युवाओं के भविष्य पर खतरा
सामाजिक कार्यकर्ता ऋषि कुणु सरांगी ने जिले में बढ़ते अवैध लॉटरी और नशे के कारोबार को गरीबों और युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सरकार व प्रशासन से आर-पार की लड़ाई छेड़ने की मांग की है। उनका आरोप है कि लॉटरी के जरिए गरीबों को आर्थिक रूप से बर्बाद कर बाद में उन्हें नशे की लत में धकेला जा रहा है।
सरांगी ने कहा कि कार्रवाई केवल छोटे विक्रेताओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे सिंडिकेट और संरक्षण देने वालों पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पीड़ित परिवारों के पुनर्वास, नशामुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं के समक्ष भी उठाया गया है।
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पृष्ठभूमि: जादूगोड़ा में अवैध लॉटरी का जाल
जादूगोड़ा और आसपास के इलाकों में अवैध लॉटरी का कारोबार लंबे समय से फल-फूल रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यहां रोजाना लाखों रुपये का अवैध सट्टा लगाया जाता है। गरीब मजदूर और दिहाड़ी कामगार जल्दी अमीर बनने के लालच में अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठते हैं। यह कारोबार स्थानीय नेताओं और पुलिस की मिलीभगत से चलता है, जिससे छोटे विक्रेताओं पर ही कार्रवाई होती है, बड़े सरगना बच निकलते हैं।

नशे के कारोबार से युवाओं का भविष्य अंधकारमय
लॉटरी की लत लगने के बाद कई युवा नशे की ओर मुड़ जाते हैं। जादूगोड़ा में नशे की तस्करी भी बढ़ रही है। गांजा, भांग और सिंथेटिक ड्रग्स आसानी से उपलब्ध हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि लॉटरी और नशे का गठजोड़ एक संगठित अपराध बन चुका है। इससे परिवार टूट रहे हैं और अपराध दर बढ़ रही है।
सरांगी की प्रमुख मांगें
ऋषि कुणु सरांगी ने सरकार के सामने पांच सूत्री मांगें रखी हैं: 1) पूरे सिंडिकेट पर कड़ी कार्रवाई, 2) दोषी अधिकारियों को निलंबित करना, 3) पीड़ित परिवारों के लिए पुनर्वास पैकेज, 4) हर प्रखंड में नशामुक्ति केंद्र खोलना, 5) अवैध लॉटरी पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए विशेष कानून। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
फिलहाल जिला प्रशासन ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। स्थानीय लोग इसे प्रशासन की लाचारी मान रहे हैं। विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा नेता ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही है। वहीं, सत्ताधारी दल के नेता जांच का आश्वासन दे रहे हैं।
निष्कर्ष: जनआंदोलन की जरूरत
अवैध लॉटरी-नशा गठजोड़ को तोड़ने के लिए केवल सरकारी कार्रवाई काफी नहीं है। जनजागरण और सामाजिक बहिष्कार जरूरी है। ऋषि कुणु सरांगी जैसे कार्यकर्ताओं की आवाज को बल मिलना चाहिए। तभी जादूगोड़ा के गरीबों और युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा। अधिक जानकारी के लिए झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

