जादूगोड़ा: सामाजिक कार्यकर्ता ऋषि कुणु सरांगी ने जिले में बढ़ते अवैध लॉटरी-नशा गठजोड़ को गरीबों और युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सरकार व प्रशासन से आर-पार की लड़ाई छेड़ने की मांग की है।
उनका आरोप है कि लॉटरी के जरिए गरीबों को आर्थिक रूप से बर्बाद कर बाद में उन्हें नशे की लत में धकेला जा रहा है।
अवैध लॉटरी-नशा गठजोड़ पर सख्त कार्रवाई की जरूरत
पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा क्षेत्र में लंबे समय से अवैध लॉटरी और मादक पदार्थों का कारोबार फल-फूल रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस धंधे में स्थानीय प्रशासन और कुछ राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों की मिलीभगत है, जिसके कारण छोटे-मोटे छापों के अलावा कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होती है। यह गठजोड़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीमक की तरह चाट रहा है, जहां दिहाड़ी मजदूर और आदिवासी परिवार अपनी गाढ़ी कमाई लुटाकर कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।
झारखंड पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो बीते दो वर्षों में जिले में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस बात का प्रमाण है कि नशे का कारोबार किस कदर पैर पसार चुका है। ऋषि कुणु सरांगी लंबे समय से आदिवासी हितों और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि अवैध लॉटरी का जाल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीमक की तरह चाट रहा है। लॉटरी में पैसा गंवाने के बाद कर्ज में डूबे लोग नशे के सौदागरों के आसान शिकार बन जाते हैं।
सरांगी ने कहा कि कार्रवाई केवल छोटे विक्रेताओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे सिंडिकेट और संरक्षण देने वालों पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने पीड़ित परिवारों के पुनर्वास, नशामुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की।

उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं के समक्ष भी उठाया गया है।
सरांगी की प्रमुख मांगें एक नजर में
- अवैध लॉटरी-नशा गठजोड़ चलाने वाले पूरे सिंडिकेट पर कठोर कानूनी कार्रवाई।
- पीड़ित गरीब परिवारों के लिए आर्थिक सहायता एवं पुनर्वास पैकेज।
- जिले में नशामुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाकर उपचार सुलभ कराना।
- अवैध कारोबार को संरक्षण देने वाले भ्रष्ट अधिकारियों की पहचान कर निलंबन।
झारखंड सरकार ने नशामुक्ति के लिए कई योजनाएं चला रखी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका क्रियान्वयन कमजोर नजर आता है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में नशे की लत के शिकार युवाओं की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। राज्य में संचालित नशामुक्ति केंद्रों की क्षमता मांग के अनुरूप नहीं है, जिसके चलते पीड़ित परिवार दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई गांवों में अवैध लॉटरी के टिकट खुलेआम बिकते देखे जा सकते हैं। स्थानीय युवा बताते हैं कि लॉटरी एजेंट पहले छोटी रकम जितवाकर लुभाते हैं, फिर बड़ी रकम हारने पर कर्ज देते हैं और कर्ज वसूली के लिए नशे की सप्लाई शुरू कर देते हैं। यह एक सुनियोजित अपराध चक्र है जिसे तोड़ने के लिए इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग की सख्त जरूरत है।
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कब तक संज्ञान लेती है और सरांगी द्वारा उठाई गई मांगों पर अमल करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करती है। जनता को उम्मीद है कि इस बार खानापूर्ति नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई होगी। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि समय रहते इस सिंडिकेट को नहीं तोड़ा गया तो आने वाली पीढ़ी को इसका भयावह परिणाम भुगतना पड़ेगा।

