यूसीआईएल पदोन्नति पर उठे सवाल: सीएमडी पर गंभीर आरोप, पारदर्शिता की मांग
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा – यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) में ग्रुप-ए अधिकारियों की हालिया पदोन्नति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रोहित प्रोजेक्ट के अधिकारी श्रीधर बाबू ने आरोप लगाया है कि पदोन्नति में नियमों और पारदर्शिता की अनदेखी की गई है।

शिकायत में कहा गया है कि कई अधिकारियों को सेवा अवधि, अनुभव और योग्यता की अनदेखी कर उच्च पदों पर पदोन्नत किया गया। उदाहरणस्वरूप, मात्र चार साल की सेवा वाले आर.के. मिश्रा को महाप्रबंधक (सिविल, पर्यावरण) बनाया गया, जबकि उनके कार्यकाल में टेलिंग डैम की स्थिति सवालों में रही। इसी तरह, 4 साल 11 माह की सेवा वाले बी.सी. गुप्ता को जीएम ग्रेड में पदोन्नत कर दिया गया।

शिकायत में यह भी आरोप है कि डीपीसी इंटरव्यू की सूची बाद में बदल दी गई, पदोन्नति आदेशों पर सीएमडी के हस्ताक्षर नहीं हैं, और सूची लीक होने से गंभीर प्रशासनिक चूक सामने आई। श्रीधर बाबू ने पदोन्नति प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और विवादित पदोन्नतियों पर रोक की मांग की है। लगातार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों से यूसीआईएल की छवि पर असर पड़ रहा है।

शिकायत में क्या हैं आरोप?
आर.के. मिश्रा को मात्र 4 साल की सेवा के बावजूद महाप्रबंधक (सिविल, पर्यावरण) पद पर पदोन्नत किया गया, जबकि उनके कार्यकाल में टेलिंग डैम की स्थिति चिंता जनक रही। बी.सी. गुप्ता को 4 साल 11 माह की सेवा पर ही जीएम ग्रेड में प्रमोशन मिला, जबकि उनके पास HR या तकनीकी योग्यता का कोई ठोस आधार नहीं बताया गया। जनवरी 2024 में हुई डीपीसी (DPC) साक्षात्कार की चयन सूची को बाद में बदल दिया गया और अन्य नाम जोड़े गए।

हितों के टकराव का मामला भी सामने आया, क्योंकि एक पदोन्नत अधिकारी स्वयं डीपीसी साक्षात्कार में HR प्रतिनिधि के रूप में मौजूद थे। पदोन्नति से जुड़ी सूची पहले ही लीक हो जाने की बात सामने आई, जो गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानी जा रही है। कई पदोन्नति आदेश बिना क्रमांक और बिना सीएमडी के हस्ताक्षर के जारी किए गए, जो वैधानिकता पर सवाल खड़े करते हैं।



