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यूसीआईएल में अधिकारियों के तबादले को लेकर उठने लगे सवाल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा. यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) में अधिकारियों के तबादले को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सीएमडी के आदेश पर 17 अधिकारियों का तबादला किया गया। लेकिन कई ऐसे अधिकारी हैं जो 15 से 20 साल से एक ही जगह टिके हुए हैं। इनका तबादला नहीं होने से नाराजगी बढ़ गई है। वहीं कुछ अधिकारियों को एक साल पहले ही जादूगोड़ा से बाहर भेजा गया था, अब उन्हें फिर से यहीं लाया जा रहा है।

स्टोर विभाग के अधिकारी सुदीप्तो दास पर करीब 10 करोड़ रुपये के सल्फ्यूरिक एसिड घोटाले में आरोप लगे हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है। इसके बावजूद उन्हें फिर से परचेज विभाग में लाया गया है। इस पर कई अधिकारियों ने आपत्ति जताई है। उन्होंने परमाणु ऊर्जा विभाग से शिकायत भी की है।
संपदा विभाग के अधिकारी दिलीप कुमार मंडल 20 साल से एक ही पद पर जमे हुए हैं। उन पर कई बार भ्रष्टाचार के आरोप लगे, लेकिन तबादला नहीं हुआ। यूसीआईएल के सीएमडी के पी ए सुरोजित दास भी करीब 15 साल से एक ही स्थान पर हैं। उन पर भी गंभीर आरोप लग चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

भाटी न माइंस में मैकेनिकल विभाग के अधिकारी सुशील कुमार सिंह 15 साल से भाटिन माइंस में ही हैं। कई अधिकारियों को बड़े अफसरों की मेहरबानी से एक ही स्थान पर रखा गया है।
यूसीआईएल ने 16 नवंबर 2024 को आदेश जारी कर सुदीप्तो दास का मूल वेतन और पद घटा दिया। कर्मचारी संख्या 7322, स्टोर जादूगोड़ा में कार्यरत दास का वेतनमान एक स्तर नीचे कर दिया गया। पहले उनका बेसिक स्केल 80000 से 220000 रुपये था। अब इसे घटाकर 120220 रुपये कर दिया गया है। यह कार्रवाई केंद्रीय सतर्कता आयोग के 25 जून 2024 के आदेश पर हुई। पत्रांक संख्या 2024/एटीएम/डीएई/वीआईजी=सीएआरई/4/32212 है।

सुदीप्तो दास पर सल्फ्यूरिक एसिड की खरीद में अनियमितता और स्टोर विभाग में उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। आयोग ने परमाणु ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट, टिप्पणियां और प्रशासनिक अधिकारियों के अभिलेखों का अवलोकन किया। अनुशासनात्मक प्राधिकारी और सीबीओ की सिफारिश पर कार्रवाई की गई। उन्हें सल्फ्यूरिक एसिड घोटाले में मुख्य अभियुक्त बनाया गया है।
यूसीआईएल में लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। इससे कंपनी की छवि खराब हो रहे हैं

