इस बार आर पार हो जाए:शैलेंद्र पांडे शैल
जीत हो जाए …हार हो जाए
इस दफ़ा आर पार हो जाए
वक़्त का क्या पता कि कब बदले
कब शिकारी शिकार हो जाए
कब तलक देखें जंग बाहर से
आ ! कि गर्दो – गुबार हो जाए
आईना बन मगर न ऐसा बन
हर कोई इश्तिहार हो जाए
इश्क़ का दायरा बढ़ा मौला
हर तरफ़ प्यार -प्यार हो जाए

