पहले चरण से पहले बढ़ा सियासी पारा: तौसीफ-ललन पर एफआईआर, मुस्लिम वोटर बने समीकरण की कुंजी
राष्ट्र संवाद संवाददाता
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले 121 सीटों पर प्रचार थम गया है। अब मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान केंद्रों तक पहुंचेंगे। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन सियासी माहौल बेहद गर्म रहा। सीमांचल और मगध क्षेत्र में तौसीफ आलम और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पर एफआईआर दर्ज होने से राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।
इस चरण में सबसे बड़ी जंग मुस्लिम और पिछड़ा वोटरों को लेकर देखी जा रही है। राजद और जदयू दोनों ही पार्टियां मुस्लिम मतदाताओं को साधने में जुटी हैं, जबकि भाजपा ने हिंदू एकजुटता के साथ विकास का मुद्दा आगे रखा है। सीमांचल में ओवैसी फैक्टर भी सक्रिय है, जिससे त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बन रही है।
जाति, धर्म और पैसा — तीनों इस बार के चुनावी मैदान में बराबर की हिस्सेदारी निभा रहे हैं। “कौन आगे, कौन पीछे” कहना अभी मुश्किल है, पर संकेत साफ हैं कि पहले चरण का मतदान बिहार की सत्ता की दिशा तय करेगा।

