
दलगत राजनीति की दीवार टूटी, निर्भय सिंह की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब अभय सिंह फूट-फूटकर रोए, और इसी के साथ शहर के एक युग का दुखद अंत हुआ। हिन्दूवादी नेता निर्भय सिंह की अंतिम यात्रा में शनिवार को जमशेदपुर में बेहद भावुक और मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। उनके अंतिम दर्शन के लिए बुद्धिजीवी, समाजसेवी, साहित्यकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता दलगत भावना से ऊपर उठकर शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
दलगत राजनीति की दीवार टूटी और उमड़ा जनसैलाब
जब शव यात्रा शुरू हुई, तो पूरा मार्ग लोगों के हुजूम से पट गया था। निर्भय सिंह के व्यक्तित्व की यही सबसे बड़ी खूबी थी कि वे पार्टी लाइन से हटकर लोगों के दिलों में बसते थे। अंतिम विदाई के इस मौके पर वहां मौजूद हर व्यक्ति के मन में गहरा दुख था। अभय सिंह, जो भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हैं, अपने प्रिय साथी निर्भय सिंह की अर्थी को कंधा देते समय खुद को संभाल नहीं सके और फूट-फूटकर रो पड़े। यह दृश्य वहां मौजूद हजारों लोगों को भी भावुक कर गया। यह दिखाता है कि राजनीति के मंच अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवीय रिश्ते अटूट होते हैं।
अंतिम यात्रा का संदेश
निर्भय सिंह की अंतिम विदाई ने समाज को एक बड़ा संदेश दिया है कि मृत्यु के सामने कोई भी दलगत राजनीति बड़ी नहीं होती। इंसानी रिश्तों की गरिमा और आत्मीयता हर प्रकार के वैचारिक मतभेदों से ऊपर है। उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए गणमान्य नागरिकों ने बताया कि वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति थे जो हर किसी के सुख-दुख में खड़ा रहता था। जमशेदपुर की गलियों में आज सन्नाटा था, क्योंकि उनका प्रिय व्यक्तित्व अब भौतिक रूप से उनके बीच नहीं रहा।
उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब उनके प्रति लोगों के अटूट सम्मान और जुड़ाव का प्रमाण बना। हिन्दूवादी नेता के रूप में उनकी पहचान तो थी ही, लेकिन उससे कहीं अधिक वे अपनी सामाजिक सेवा के लिए जाने जाते थे। उनके निधन से शहर के हर वर्ग में शोक की लहर दौड़ गई है। अभय सिंह का बिलखना इस बात की गवाही देता है कि उनके बीच का संबंध राजनीतिक नहीं, बल्कि पारिवारिक और वैचारिक था जो कई दशकों से चला आ रहा था। अंतिम संस्कार के समय जब चिता को मुखाग्नि दी गई, तो सभी की आंखें नम थीं और प्रार्थनाओं का स्वर गूंज रहा था। अंततः निर्भय सिंह पंचतत्व में विलीन हो गए, लेकिन उनकी स्मृतियां हमेशा जीवंत रहेंगी।

