लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
पोटका प्रखंड के धीरोल पंचायत अंतर्गत नुतनडीह में सरकारी जमीन की बिक्री और अतिक्रमण का मामला अंचल की मापी के बाद सामने आया है। अंचल कार्यालय की ओर से कराई गई मापी में घेराबंदी किए गए क्षेत्र में 3.10 एकड़ सरकारी जमीन और 3.59 एकड़ रैयती जमीन होने की बात सामने आई है। मामले के उजागर होने के बाद जमीन कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
रैयती जमीन के साथ सरकारी जमीन की भी कर दी बिक्री!
मापी में 3.10 एकड़ सरकारी जमीन निकली, सीमेंट स्लैब से की गई थी घेराबंदी
अंचल अधिकारी निकिता बाला के निर्देश पर मंगलवार को अंचल अमीन एवं कर्मचारियों की मौजूदगी में जमीन की मापी की गई। मापी के बाद तैयार रिपोर्ट देर शाम अंचल अधिकारी को सौंपी गई। रिपोर्ट के अनुसार, जिस क्षेत्र में सीमेंट स्लैब से घेराबंदी की गई है, उसमें 3.10 एकड़ सरकारी जमीन शामिल है, जबकि 3.59 एकड़ रैयती जमीन की खरीदारी की गई है। आरोप है कि जमीन दलालों द्वारा रैयती जमीन के नाम पर सरकारी जमीन को भी बिक्री के दायरे में शामिल कर दिया गया।
सरकारी जमीन की घेराबंदी पर तीन के खिलाफ
जेपीएलई एक्ट में कार्रवाई: शांति मिश्र, प्रिया वर्मा और अपर्णा कुमारी को नोटिस, अंचल कार्यालय में पक्ष रखने का निर्देश
नुतनडीह में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर घेराबंदी किए जाने के मामले में अंचल अधिकारी की ओर से शांति मिश्र, प्रिया वर्मा एवं अपर्णा कुमारी के खिलाफ झारखंड पब्लिक लैंड एन्क्रोचमेंट (JPLE) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। तीनों के नाम नोटिस जारी कर उन्हें अंचल अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।
सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग, कांग्रेस ने सीओ को सौंपा ज्ञापन
जिला कांग्रेस कमिटी ने कर्मचारियों की भूमिका की जांच और कार्रवाई की मांग उठाई
पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमिटी के जिला सचिव जयराम हंसदा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने अंचल अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि थाना नंबर 1355, मौजा बांगो में अनावाद बिहार/झारखंड सरकारी जमीन के विभिन्न प्लॉटों पर अतिक्रमण कर पक्की दीवार से घेराबंदी की गई है। ज्ञापन में प्लॉट संख्या 18, 23, 16, 5, 223, 224, 235, 236, 245, 10 एवं 29 का उल्लेख करते हुए कुल 10 एकड़ 46 डिसमिल सरकारी जमीन के अतिक्रमण का आरोप लगाया गया है। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने पूरे मामले की जांच कर दोषी लोगों के साथ-साथ संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच एवं कार्रवाई की मांग की।
3.10 एकड़ सरकारी जमीन निकली अतिक्रमण की जद में, प्रशासन ने कसा शिकंजा
मापी रिपोर्ट के बाद जेपीएलई कार्रवाई शुरू, कांग्रेस ने भी उठाया मामला
पोटका। नुतनडीह में सरकारी जमीन की कथित खरीद-बिक्री और अतिक्रमण का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई के दौर में पहुंच गया है। अंचल की मापी में 3.10 एकड़ सरकारी जमीन मिलने के बाद तीन लोगों के खिलाफ जेपीएलई एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं जिला कांग्रेस कमिटी ने भी सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने और मामले में जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल में सुबोध सिंह सरदार, शिव चरण टुडू, आनंद पाल, शंकर कुमार दत्त, सीताराम सोरेन का नाम जोड़ देंगे।
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सवालों के घेरे में नुतनडीह की सरकारी जमीन!
वाणिज्य कर पदाधिकारी की देखरेख में हुआ भूमि माफियाओं का खेल?
‘डॉक्टर’ कौन और असली भूमि माफिया कौन?
3.10 एकड़ सरकारी जमीन आखिर किसके इशारे पर घेर दी गई?
रैयती जमीन के साथ सरकारी जमीन भी बिक्री के दायरे में कैसे आ गई?
सीमेंट स्लैब से सरकारी जमीन की घेराबंदी होती रही, तो जिम्मेदार कर्मचारी क्या कर रहे थे?
जिन प्लॉटों पर वर्षों से सरकारी जमीन होने का रिकॉर्ड है, वहां जमीन का कारोबार किसने और किसके भरोसे पर किया?
‘डॉक्टर’ नाम से चर्चा में आने वाला शख्स कौन है और पूरे खेल में उसकी क्या भूमिका है?
क्या पर्दे के पीछे कोई प्रभावशाली चेहरा भूमि कारोबारियों को संरक्षण दे रहा था?
कांग्रेस ने कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की है क्या जांच में जमीन माफिया के साथ सरकारी तंत्र की मिलीभगत भी सामने आएगी?
3.10 एकड़ सरकारी जमीन के अतिक्रमण का खुलासा हो गया, अब क्या पूरी जमीन वापस लेकर असली जिम्मेदारों तक प्रशासन पहुंचेगा?
सबसे बड़ा सवाल: सरकारी जमीन की घेराबंदी और कथित खरीद-बिक्री का खेल इतने लंबे समय तक आखिर किसकी छत्रछाया में चलता रहा?
अधिक जानकारी के लिए झारखंड राजस्व विभाग की वेबसाइट देखें।
