वर्दी की असली पहचान जनता का भरोसा
राष्ट्र संवाद संवाददाता
किसी पुलिस अधिकारी की पहचान केवल अपराधियों पर कार्रवाई, हथियारों की बरामदगी या आंकड़ों में दर्ज उपलब्धियों से नहीं होती। असली पहचान तब बनती है, जब वर्दी और आम आदमी के बीच भरोसे का रिश्ता कायम हो। धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार का राष्ट्रीय स्तर पर टॉप-25 प्रमुख पुलिस कप्तानों में शामिल होना इसी भरोसे और कार्यशैली की एक महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति है।
‘फेम इंडिया–एशिया पोस्ट’ के सर्वेक्षण में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, संकट प्रबंधन, त्वरित निर्णय क्षमता, तकनीक के इस्तेमाल और जनहितैषी पुलिसिंग जैसे मानकों पर अधिकारियों का मूल्यांकन किया गया। झारखंड से पांच अधिकारियों का पहले चरण में चयन होना गौरव की बात थी, लेकिन अंतिम 25 में केवल प्रभात कुमार का स्थान बनाना निश्चित रूप से उल्लेखनीय उपलब्धि है।
प्रभात कुमार की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह दिखाई देती है कि वे पुलिसिंग को केवल कार्यालय और फाइलों तक सीमित नहीं रखते। जहां भी उनकी पोस्टिंग हुई, वहां आम जनता से सीधा संवाद और जुड़ाव उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा। यही जुड़ाव धीरे-धीरे उनकी पहचान और काबिलियत की पहचान बनता गया।
धनबाद जैसे चुनौतीपूर्ण औद्योगिक जिले में संगठित अपराध और साइबर ठगी के खिलाफ कार्रवाई, तकनीक आधारित पुलिसिंग तथा लंबित मामलों के निष्पादन ने उनकी कार्यक्षमता को सामने रखा है। यही वजह है कि झारखंड के मीडिया संस्थानों से लेकर सोशल मीडिया तक उनकी कार्यशैली की चर्चा हो रही है।
हालांकि किसी भी सम्मान की वास्तविक कसौटी जनता का विश्वास ही है। और यदि वर्दी देखकर आम नागरिक के मन में भय नहीं, बल्कि भरोसा पैदा हो तो उससे बड़ी पुलिसिंग की सफलता शायद कोई नहीं।

