UCIL का स्वर्णिम काल 2000 से 2011 तक, फिर क्यों थम गई नई माइंस की रफ्तार?
पूर्व CMD डॉ. रमेंद्र गुप्ता का बड़ा बयान—तुरामडीह और तुमलापल्ली जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स ने बदली कंपनी की तस्वीर, हीरक जयंती पर उसी जज्बे और विजन के साथ आगे बढ़ने की जरूरत
राष्ट्र संवाद जादूगोड़ा
*जादूगोड़ा।* यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) इस साल अपना *हीरक जयंती (Diamond Jubilee)* मना रही है। 60 साल के इस गौरवशाली सफर में अगर किसी एक कार्यकाल को UCIL कर्मी और अधिकारी आज भी सबसे बेहतर, सबसे स्वर्णिम काल के रूप में याद करते हैं, तो वह है *पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) डॉ. रमेंद्र गुप्ता का कार्यकाल – वर्ष 2000 से 2011 तक।*
*राष्ट्र संवाद / से विशेष वार्ता में डॉ. रमेंद्र गुप्ता ने अपने कार्यकाल की यादों को साझा किया और UCIL के भविष्य को लेकर अपना विजन भी रखा। उन्होंने हीरक जयंती के अवसर पर सभी UCIL परिवार, कर्मियों, अधिकारियों और जादूगोड़ा की जनता को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
*11 साल में 5 माइंस, 2 प्लांट – UCIL ने रचा इतिहास*
डॉ. गुप्ता ने बताया कि 2000 से 2011 के बीच UCIL ने विस्तार के नए कीर्तिमान स्थापित किए।
_”मेरे कार्यकाल में हमने 5 नई यूरेनियम माइंस और 2 नए प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन किया था। इसमें *तुरामडीह प्लांट और आंध्र प्रदेश का तुमलापल्ली प्लांट* प्रमुख रूप से शामिल है, जिसने देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को नई ताकत दी।”_
उनके कार्यकाल में न सिर्फ माइंस और प्लांट खुले, बल्कि UCIL के उत्पादन (Production) में भी कई गुना बढ़ोतरी हुई। देश की ऊर्जा सुरक्षा में UCIL की भूमिका और मजबूत हुई।
उन्होंने बताया कि इस दौरान कर्मचारियों के हित में भी ऐतिहासिक फैसले लिए गए। *UCIL कर्मियों को उस दौर में सबसे अच्छा वेतन समझौता (Wage Agreement)* मिला, जिससे कर्मचारियों में नई ऊर्जा और कंपनी के प्रति गर्व का भाव आया।
*15 साल से एक भी नया माइंस नहीं खुला, इसका अफसोस है*
हीरक जयंती की खुशी के साथ ही डॉ. गुप्ता ने एक अफसोस भी जाहिर किया।
_”मुझे इस बात का बहुत अफसोस है कि मेरे रिटायर होने के बाद पिछले 15 सालों में UCIL में एक भी नई माइंस नहीं खुली है और न ही कोई नया प्लांट लगा है। कई प्लांटों में एक्सपेंशन का काम प्रस्तावित था – जैसे तुरामडीह, नरवापहाड़, तुमलापल्ली में, लेकिन वह भी आज तक गति नहीं पकड़ पाया है।”_
उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान को चलाने के लिए सबसे जरूरी है *आपसी तालमेल, कर्मचारियों-अधिकारियों के साथ CMD का एक स्पष्ट और निश्चित प्लान।*
*2047 के लक्ष्य के लिए नया प्लांट जरूरी – विदेशों पर निर्भरता खत्म करनी होगी*
डॉ. गुप्ता ने कहा कि भारत सरकार ने *2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा* का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए UCIL को युद्धस्तर पर काम करना होगा।
_”100 गीगावाट के लक्ष्य के लिए सिर्फ पुराने प्लांट से काम नहीं चलेगा। नए प्लांट खोलने होंगे, प्रोडक्शन में बड़ी बढ़ोतरी करनी होगी। साथ ही UCIL को अब विदेश में भी अपनी माइंस खोलने के बारे में सोचना चाहिए। यूरेनियम के लिए हम हमेशा विदेश पर निर्भर नहीं रह सकते। देश में भी कई जगहों पर प्रोसेसिंग प्लांट खोलने की जरूरत है, जहां आज तक एक भी प्रोसेसिंग प्लांट नहीं है।”_
उन्होंने यह भी कहा कि बड़े-बड़े अधिकारियों के पद लंबे समय तक खाली रहने से भी संस्थान की गति पर असर पड़ता है, इसे तुरंत भरा जाना चाहिए।
*विकास में जनता को साथ लेना जरूरी, पत्नी सरोज गुप्ता का रहा अहम योगदान*
डॉ. गुप्ता ने कहा कि कोई भी उद्योग तभी सुगमता से चल सकता है जब वह *स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधियों, एमएलए, एमपी और ग्रामीणों को विश्वास में लेकर* चले।
_”क्षेत्र में CSR का काम लगातार होते रहना चाहिए। जनता को लगे कि यह कंपनी हमारी है। मेरे समय में हम अस्पताल की व्यवस्था, मरीजों के इलाज पर विशेष ध्यान देते थे। डॉक्टरों की कमी होने पर हम अच्छे डॉक्टरों को अडॉप्ट भी करते थे।”_
इस पूरे सफर में उन्होंने अपनी *धर्मपत्नी श्रीमती सरोज गुप्ता* के योगदान को विशेष रूप से याद किया।
_”मेरे हर CSR और सामाजिक कार्य में मेरी पत्नी सरोज गुप्ता का बहुत बड़ा और अहम योगदान रहा है। वे हमेशा क्षेत्र के विकास के कार्यों में मेरा सहयोग करती थीं, महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों से सीधे जुड़ती थीं। उनके सहयोग से ही जनता का विश्वास हमें मिला।”_
अंत में उन्होंने कहा कि जब जरूरत पड़े तो *पुराने अनुभवी अधिकारियों और एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लेनी चाहिए,* क्योंकि अनुभव ही भविष्य की नींव है।
उन्होंने UCIL के हीरक जयंती वर्ष में कामना की कि UCIL फिर से अपने स्वर्णिम युग की ओर लौटे और देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में सबसे बड़ी भूमिका निभाए।

