दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर झामुमो युवा नेता कुंदन कुमार महतो की श्रद्धांजलि,कहा “एक युग का अंत”
नाला/जामताड़ा: झारखंड की राजनीति में एक शून्यता पैदा हो गई है, क्योंकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और आदिवासी समाज के महान नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन हो गया। इस दुखद अवसर पर झामुमो के युवा नेता कुंदन कुमार महतो ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा, “दिशोम गुरु सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि आदिवासी चेतना के प्रतीक थे। उनसे जब भी मुलाकात होती थी, कुछ नया सिखने को मिलता था। उनके अनुभव, उनकी सहजता और जनता के प्रति उनकी निष्ठा से हम युवा कार्यकर्ता हमेशा प्रेरणा लेते थे।”
कुंदन महतो ने कहा कि दिशोम गुरु ने झारखंड को एक अलग पहचान दिलाने के लिए लंबा संघर्ष किया। उन्होंने आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी और सदैव उनके विकास के लिए काम किया। “उनका जीवन आदर्शों और संघर्षों से भरा हुआ था। वे जमीन से जुड़े नेता थे, जिन्होंने कभी सत्ता की चकाचौंध को अपने आदर्शों पर हावी नहीं होने दिया।”
कुंदन ने बताया कि वे जब भी दिशोम गुरु से मिलते थे, उन्हें राजनीति से आगे बढ़कर समाज के लिए सोचने की प्रेरणा मिलती थी। “वे हमेशा कहते थे कि नेता वही होता है जो सबसे पहले समाज के अंतिम व्यक्ति की चिंता करे।”
दिशोम गुरु के निधन को कुंदन ने “एक युग का अंत” बताया। उन्होंने कहा कि अब यह हम युवाओं की जिम्मेदारी है कि हम उनके अधूरे सपनों को पूरा करें और झारखंड के आदिवासी समाज को सशक्त बनाएं।
झामुमो परिवार, राज्य की जनता और समस्त देशवासियों के लिए यह अपूरणीय क्षति है। शिबू सोरेन की स्मृति और शिक्षाएं सदैव हमें मार्गदर्शन देती रहेंगी।

