चांडिल बाजार की बदहाल नालियों पर फूटा जन आक्रोश,
रथयात्रा से पहले क्या जागेगा प्रशासन ?
राष्ट्र संवाद संवाददाता
संजय कुमार
चांडिल : ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र का हृदयस्थली कहे जाने वाला चांडिल बाजार इन दिनों बदहाल कुव्यवस्था का दंश झेल रहा है। जमशेदपुर-पुरुलिया मुख्य मार्ग पर स्थित चांडिल बाजार की नालियां वर्षों से जाम हैं और बारिश के मौसम में हालत और भी विकराल हो जाती है। जगह-जगह बजबजाती नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जो अब दुकानों और घरों में घुसने लगा है। इससे लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नालियों की सफाई और बाजार की नियमित देखरेख की परंपरा पूर्व विधायक अरविंद सिंह और सुधीर महतो के समय तक ही थी। इसके बाद पूर्व भाजपा विधायक साधु चरण महतो ने निजी खर्च से नालियों की सफाई करवाई और 2019 में चांडिल बाजार समिति का पुनर्गठन करवाया, जिसमें तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी और विधायक भी शामिल थे। लेकिन वर्तमान में यह समिति केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है।
राजनीतिक खींचतान और स्वार्थ की लड़ाई ने बाजार समिति को मजाक बना दिया है। आधा दर्जन से अधिक समितियां बनीं, लेकिन आज उनका कोई अस्तित्व नहीं है। समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव केवल नाम के पदाधिकारी बनकर रह गए हैं, जबकि कुछ चाटुकार ओर असामाजिक किस्म के लोगों को दुकानदारों की जगह सदस्य बना दिया गया है, जो अब टोली कहे या ग्रुप बना पद का रौब झाड़ते घूम रहे हैं।
चांडिल बाजार का नामोंपाड़ा, एक्सिस बैंक से लेकर रेलवे फाटक, बस स्टैंड चौक बाजार से लेकर डैम रोड तक की नालियां नारकीय स्थिति में हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 27 जून रथयात्रा जैसे पवित्र पर्व के पूर्व भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी है। क्या इस बार भगवान जगन्नाथ गंदे नालों के पानी से होकर गुजरेंगे? यह सवाल अब आम जनता के मन में घर कर चुका है।
हर दिन लग्जरी गाड़ियों से प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और समाजसेवा का चोला ओढ़े लोग बाजार से गुजरते हैं, लेकिन किसी की नजर इस गंदगी पर नहीं पड़ती। उनकी कथनी और करनी में फर्क अब चांडिलवासियों को खटकने लगा है।
स्थानीय लोगों में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार समाज सेवा ,स्वच्छता संगठनों के आकाओं के प्रति आक्रोश है। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि अब तो ऐसा लगता है मानो चांडिल बाजार की बदहाली को सभी ने अपनी नियति मान लिया है। आखिर जनता के धैर्य की परीक्षा कब तक चलेगी, यह बड़ा सवाल है ?

