रिपोर्ट – अमन ओझा (ब्यूरो चीफ, कोल्हान)
नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है, जहां वार्ड पार्षद के पद पर प्रतिनिधि के आ जाने के बावजूद सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। स्थानीय पार्षदों का आरोप है कि सफाई कर्मचारी उनकी बात नहीं मानते और अपनी मनमानी करते हैं। पहले जहां प्रत्येक वार्ड में तीन महिला और तीन पुरुष सफाई कर्मचारी तैनात किए जाते थे, वहीं अब केवल एक पुरुष और दो महिला कर्मियों के भरोसे पूरे वार्ड की सफाई कराई जा रही है। यही नहीं, इन्हीं सीमित कर्मचारियों से छठ घाट की सफाई भी कराई जा रही है, जिससे वार्ड की नियमित सफाई प्रभावित हो रही है। स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब नगर निगम के रिकॉर्ड में हर वार्ड में आठ सफाई कर्मचारियों की तैनाती दर्शाई गई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि बाकी कर्मचारी आखिर कहां हैं? पिछले करीब तीन वर्षों तक वार्ड की सफाई व्यवस्था बदहाल रही और अब जब 35वें पार्षद ने पुनः पदभार संभाला है, तब भी हालात जस के तस बने हुए हैं। खासतौर पर वार्ड 17 हरिओम नगर एक में बजबजाती नालियां और गंदगी का अंबार लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। छठ जैसे महत्वपूर्ण पर्व के दौरान भी नगर निगम द्वारा पहले की तरह पर्याप्त सफाई कर्मियों की व्यवस्था नहीं की जा रही है, जबकि पूर्व में हर साल करीब 100 कर्मचारियों को घाटों की सफाई के लिए लगाया जाता था। स्थानीय लोगों में इसको लेकर भारी नाराजगी है और वे जल्द से जल्द व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।

