

जमशेदपुर: दीपावली एवं छठ पर्व से पहले मानगो क्षेत्र की बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर जनप्रतिनिधियों ने अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय नागरिकों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद, पार्षद एकता मंच के सदस्यों ने अध्यक्ष राजेश सिंह के नेतृत्व में वार्ड संख्या-32 का औचक निरीक्षण किया और जमीनी हकीकत का जायजा लिया। इस निरीक्षण के दौरान जो तस्वीरें सामने आईं, वे वाकई हैरान करने वाली थीं और मानगो नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
मानगो के वार्ड-32 में गंदगी का अंबार, सफाई की मांग को लेकर उतरे पार्षद
जब जनप्रतिनिधियों का दल वार्ड के भीतर दाखिल हुआ, तो उन्हें हर कदम पर प्रशासनिक लापरवाही के सबूत मिले। सड़कों पर खुलेआम गंदा पानी बह रहा था, जिससे आसपास के घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है। गलियों और चौराहों पर कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए थे, जिनसे उठने वाली दुर्गंध ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि सड़क किनारे मृत जानवर भी पड़े मिले, जिन्हें उठाने वाला कोई नहीं था। इस अमानवीय और असहनीय स्थिति ने मानगो नगर निगम की सफाई व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

छठव्रतियों की आस्था पर भारी पड़ रही निगम की उदासीनता
मंच के अध्यक्ष राजेश सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में महापर्व छठ का आयोजन होने जा रहा है। इसी क्षेत्र से हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु और व्रतधारी शुद्ध मन से स्वर्णरेखा नदी के छठ घाटों तक पैदल गुजरते हैं। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और नगर निगम द्वारा क्षेत्र की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस संबंध में कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों की कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
आप इस संबंध में झारखंड की प्रशासनिक गतिविधियों की अधिक जानकारी के लिए प्रभात खबर की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
स्थानीय लोगों में पनप रहा है भारी आक्रोश
वार्ड के स्थानीय रहवासियों का कहना है कि त्योहार के इस पावन सीजन में भी यदि साफ-सफाई नहीं हुई, तो बीमारी फैलने का खतरा और अधिक बढ़ जाएगा। मच्छरों का प्रकोप चरम पर है और बच्चे तथा बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं। पार्षद एकता मंच ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नगर निगम ने इस दिशा में कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की, तो वे जनता को साथ लेकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह होगा कि कुंभकर्णी नींद सो रहा प्रशासन इस चेतावनी के बाद जागता है या जनता को यूं ही नरकीय जीवन जीने के लिए छोड़ दिया जाता है।

