Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » जीवनधारा नदियों के लुप्त होने का खतरा: संरक्षण का संकल्प
    Breaking News Headlines जमशेदपुर मेहमान का पन्ना संथाल परगना सरायकेला-खरसावां

    जीवनधारा नदियों के लुप्त होने का खतरा: संरक्षण का संकल्प

    Sponsored By: सोना देवी यूनिवर्सिटीSeptember 29, 2025No Comments7 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    बुजुर्गों का भरण-पोषण
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    – ललित गर्ग –

    नदियां मात्र जलधाराएं नहीं हैं, वे जीवन की धमनियां हैं, सभ्यता की जननी हैं और प्रकृति का शाश्वत उपहार हैं। मानव सभ्यता का इतिहास गवाह है कि हर संस्कृति और हर महान नगरी का उदय नदियों के तट पर हुआ। गंगा, सिंधु, नील, अमेज़न, यांग्त्सी जैसी नदियाँ केवल भूगोल का निर्माण ही नहीं करतीं, बल्कि कृषि, व्यापार, परिवहन, ऊर्जा, आस्था और संस्कृति को भी दिशा देती हैं। विश्व स्तर पर हर वर्ष सितंबर के चौथे रविवार को मनाया जाने वाला विश्व नदी दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि नदियां हमारी अस्तित्व-रेखा हैं और उनका संरक्षण करना किसी विकल्प का नहीं बल्कि हमारे जीवन के अस्तित्व का प्रश्न है। 2005 में, संयुक्त राष्ट्र के ‘जीवन के लिए जल दशक’ की शुरुआत के उपलक्ष्य में, नदी अधिवक्ता मार्क एंजेलो ने विश्व नदी दिवस के गठन का प्रस्ताव रखा। यह अंतर्राष्ट्रीय प्रयास कनाडा में 1980 में एंजेलो द्वारा शुरू किए गए बीसी नदी दिवस की सफलता से प्रेरित था। विश्व नदी दिवस नदियों के महत्व को रेखांकित करता है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नदियों की बेहतर देखभाल-संरक्षण-संवर्धन का समर्थन करते हुए जन जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करता है। इस वर्ष की थीम ‘हमारी नदियाँ, हमारा भविष्य’ है, जो नदियों की रक्षा, जल अधिकारों को बनाए रखने और नदी प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की आवाज को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर केंद्रित है।

     

     

    संयुक्त राज्य अमेरिका का लगभग 65 प्रतिशत पेयजल नदियों से आता है, इसी तरह भारत सहित अनेक देशों में पेयजल का मुख्य स्रोत नदियां ही है। नदियां हमें बिजली पैदा करने, फसलों को पानी देने और पीने योग्य पानी उपलब्ध कराती हैं। यही कारण है कि एम्स्टर्डम, बैंकॉक और बर्लिन जैसे समृद्ध शहर नदियों के किनारे बसे हैं। दुर्भाग्य यह है कि जिन नदियों ने हमें जीवन दिया, हमने उन्हीं को प्रदूषण और विनाश की गर्त में धकेल दिया। औद्योगिक इकाइयों का रासायनिक कचरा, नगरों का गंदा पानी, प्लास्टिक और घरेलू अपशिष्ट ने नदियों को गटर में बदल दिया है। अंधाधुंध बांध निर्माण और जलविद्युत परियोजनाओं ने उनकी प्राकृतिक धारा को बाधित किया है। धार्मिक आस्थाओं और अंधविश्वासों के नाम पर मूर्तियों और अस्थियों का विसर्जन नदियों की पवित्रता को विषाक्त बना रहा है। जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के पिघलने से नदियों के अस्तित्व पर संकट गहरा रहा है। भारत में गंगा, यमुना, चंबल, साबरमती जैसी नदियां इस प्रदूषण और शोषण का शिकार हैं, वहीं विश्व स्तर पर अमेज़न, नील और डेन्यूब जैसी नदियां भी प्रदूषण और अत्यधिक दोहन की मार झेल रही हैं। पृथ्वी की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपनी जीविका के लिए मछलियों पर निर्भर है, इसलिए हमें औद्योगिक कचरे के कारण नदियों के क्षरण को सक्रिय रूप से रोकने और पानी के नीचे के पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है।
    नदियां केवल जल का स्रोत नहीं बल्कि जीव-जंतुओं और वन्य जीवन की धुरी हैं। असंख्य मछलियां, कछुए, पक्षी और जलीय प्राणी नदियों से अपना जीवन पाते हैं। जब नदी प्रदूषित होती है तो यह जैवविविधता समाप्त होने लगती है, खेत बंजर हो जाते हैं, भूजल स्तर गिर जाता है और प्रकृति का संतुलन बिगड़ने लगता है। नदियों की मृत्यु वास्तव में पृथ्वी/सृष्टि की मृत्यु है। इन परिस्थितियों में यह आवश्यक है कि नदियों के संरक्षण को हम केवल सरकारी योजनाओं या नीतियों तक सीमित न रखें, बल्कि इसे जनांदोलन का रूप दें। प्रदूषण पर कठोर नियंत्रण, जल प्रबंधन, वर्षा जल संचयन, शोधन संयंत्रों की अनिवार्यता और सामाजिक जागरूकता ही वे उपाय हैं जिनसे नदियों को नया जीवन दिया जा सकता है। गंगा एक्शन प्लान और नमामि गंगे जैसी योजनाएँ तभी सार्थक होंगी जब समाज ईमानदारी से अपने हिस्से का कर्तव्य निभाएगा। नदियों को गंदा करना आत्मघात है और उन्हें बचाना जीवन रक्षा का संकल्प।

     

     

    भारत में कई नदियां सूखने या प्रदूषित होने के कारण मरने के कगार पर हैं। इन नदियों की हालत इतनी खराब हो गई है कि कुछ तो नालों में बदल गई हैं और उनका नदी होना भी मुश्किल है। तेजी से बढ़ते प्रदूषण, तथाकथित भौतिकवादी सोच एवं नदियों के प्रति उपेक्षा एवं दोहन के कारण कई नदियां अब ‘मृत’ होने की कगार पर है। गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियां भी दुनिया की प्रदूषित नदियों में शामिल हो चुकी है। नदियां के अत्यधिक ख़तरे में होने से मानव जीवन, पर्यावरण एवं प्रकृति भी संकट में है। जरूरत है मानसूनी जल को नदियों से जोड़ने एवं संरक्षित करने की। देश में सर्वत्र नदियों का अस्तित्व खतरे में है। विशेषतः उत्तर प्रदेश में नदियों की संख्या लगभग 1,000 है, जिनका 55 हजार किलोमीटर का नेटवर्क है। उनमें से 30 हजार किलोमीटर क्षेत्र में जल घटा है या सूखा है। प्रदेश की 100 छोटी और सहायक नदियां सूख चुकी हैं। बिहार की 50 से अधिक नदियां संकट में हैं। इनमें 32 बड़ी नदियां सूख चुकी हैं, जबकि 18 में पानी थोड़ा बचा है। यमुना नदी भारत की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है और यह अत्यधिक प्रदूषण और पानी के अत्यधिक दोहन के कारण मरने के कगार पर है। साहिबी नदी, जो कभी दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान की एक महत्वपूर्ण नदी थी। हैरानी की बात है कि गंगा, सोन और अघवारा जैसी बड़ी नदियों में भी पानी कम है। उत्तराखंड में अल्मोड़ा-हल्द्वानी की लाइफलाइन कोसी और गौला नदियों का जलस्तर कम हो रहा है।

     

    जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा के तरीकों में बदलाव आया है, जिससे कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बढ़ गई है और नदियों में पानी का प्रवाह कम हो गया है। नदियों से रेत का अवैध खनन भी नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा रहा है और नदियों के बहाव को बदल रहा है। जंगलों की कटाई से मिट्टी का कटाव बढ़ रहा है, जिससे नदियों में गाद जमा हो रही है और उनकी गहराई कम हो रही है। भारत नदियों का एक अनोखा देश है जहां नदियों को पूजनीय माना जाता है। गंगा, यमुना, महानदी, गोदावरी, नर्मदा, सिंधु (सिंधु), और कावेरी जैसी नदियों को देवी-देवताओं के रूप में पूजा जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन में बनाया गया जल शक्ति मंत्रालय, नदी घाटियों में आर्द्रभूमि के पुनरुद्धार और संरक्षण और नदी प्रदूषण के खतरनाक स्तर से निपटने पर ध्यान केंद्रित करता है। देश के समक्ष वाटर विजन 2047 प्रस्तुत किया गया है यानी आजादी के सौ वर्ष पूरे होने तक देश को प्रत्येक वह कार्य करना है, जो देश को पानी के मामलों में सबल बना सके। इसमें हमारी नदियां भी शामिल हैं।

     

    नदियां मानव अस्तित्व का मूलभूत आधार है और देश एवं दुनिया की धमनियां हैं, इन धमनियों में यदि प्रदूषित जल पहुंचेगा तो शरीर बीमार होगा, लिहाजा हमें नदी रूपी इन धमनियों में शुद्ध जल के बहाव को सुनिश्चित करना होगा। नदियों को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किये जाने की जरूरत है। देश में नदी जल एवं नदियों के लिए कानून बने हुए है, आवश्यक हो गया है कि उस पर पुनर्विचार कर देश के व्यापक हित में विवेक से निर्णय लिया जाना चाहिए। हमारे राजनीतिज्ञ, जिन्हें सिर्फ वोट की प्यास है और वे अपनी इस स्वार्थ की प्यास को इस पानी से बुझाना चाहते हैं। यह किसी से छिपा नहीं है कि हमारे देश में गर्मी और लू के दिन जहां बढ़ रहे हैं, वहीं बरसात के दिन घटते जा रहे हैं। ऐसे में मानसूनी वर्षा के जल को यदि सलीके से नहीं सहेजा गया तो देश की सामाजिक-आर्थिक-प्राकृतिक स्थिति पर जल-संकट का बड़ा घातक प्रभाव होगा।

     

     

    विश्व नदी दिवस हमें यह चेतावनी देता है कि यदि नदियां सूख जाएंगी, प्रदूषित हो जाएंगी या विलुप्त हो जाएंगी तो मानव सभ्यता का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। नदियां हमारी जीवनरेखा और सांस्कृतिक धरोहर हैं, उनका संरक्षण करना ही आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन और आशा को बचाना है। यह अवसर हमें यह संकल्प लेने का आह्वान करता है कि हम नदियों को केवल उपयोग की वस्तु न समझें, बल्कि जीवित प्राणी की तरह उनका सम्मान करें, क्योंकि नदी बचेगी तो जीवन बचेगा, नदी बहेगी तो संस्कृति बहेगी।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleभगत सिंह: “इंकलाब से आज तक”
    Next Article दैनिक पंचांग एवं राशिफल

    Related Posts

    भाजपा जमशेदपुर महानगर की मासिक संगठनात्मक बैठक हुई संपन्न, बूथ सशक्तिकरण और एसआईआर अभियान पर विशेष जोर

    July 11, 2026

    13 करोड़ की योजनाओं का क्रियान्वयन हफ्ते भर में शुरु करवाएं अपर नगर आयुक्तःसरयू राय

    July 11, 2026

    गोलमुरी में सड़क हादसों पर रोक की मांग, जेडीयू ने जुस्को महाप्रबंधक को सौंपा ज्ञापन

    July 11, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    भाजपा जमशेदपुर महानगर की मासिक संगठनात्मक बैठक हुई संपन्न, बूथ सशक्तिकरण और एसआईआर अभियान पर विशेष जोर

    13 करोड़ की योजनाओं का क्रियान्वयन हफ्ते भर में शुरु करवाएं अपर नगर आयुक्तःसरयू राय

    गोलमुरी में सड़क हादसों पर रोक की मांग, जेडीयू ने जुस्को महाप्रबंधक को सौंपा ज्ञापन

    खगड़िया में मोबाइल स्नैचर की खतरनाक करतूत, यात्रियों ने पकड़कर 9 किमी तक ट्रेन से लटकाए रखा

    रोटरी क्लब ने शुरू किया वर्षभर चलने वाला सड़क सुरक्षा अभियान

    पेआउट कटौती के विरोध में ब्लिंकिट डिलीवरी पार्टनर्स की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी

    डीडी बार हमला मामले में मुख्य आरोपी राहुल दुबे गिरफ्तार, निशानदेही पर बरामद हुआ घटना में प्रयुक्त चापड़

    टीम भावना और समय का सम्मान सफलता की कुंजी : ब्रिज किशोर सिंह

    SIR प्रक्रिया तेज करने की मांग: कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से की मुलाकात

    जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया का कहर जारी, 12 दिनों में 1,731 मरीज मिले, 6 लोगों की मौत

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.