राष्ट्र संवाद संवाददाता
कभी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध घाटशिला अनुमंडल अब तेजी से साइबर अपराधियों का नया अड्डा बनता जा रहा है। पुलिस और सीआईडी की जांच में सामने आया है कि जादूगोड़ा, राखा माइंस, कोकदा, कुलडीहा और तिलामुंडा जैसे ग्रामीण इलाकों में साइबर ठगों का मजबूत नेटवर्क सक्रिय है। राष्ट्रीय राजमार्ग-33 के किनारे स्थित ढाबों, होटलों और जंगलों को अपराधियों ने अपना अस्थायी “ऑफिस” बना लिया है, जहां से फर्जी सिम, लैपटॉप, वीपीएन और वॉइस चेंजर की मदद से देशभर के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए गिरोह हर दो-तीन दिन में अपना ठिकाना बदल देता है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह “डिजिटल अरेस्ट” और फर्जी APK फाइल के जरिए ठगी के नए तरीके अपना रहा है। एक मामले में खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर रिटायर्ड डॉक्टर से 38.62 लाख रुपये की ठगी की गई, जबकि फर्जी जॉब और लोन लिंक भेजकर मोबाइल हैक कर यूसीआईएल जादूगोड़ा के चार अधिकारियों से करीब 1.25 करोड़ रुपये की ठगी की गई। दिल्ली पुलिस और पूर्वी सिंहभूम साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 14 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह गरीब ग्रामीणों, छात्रों और महिलाओं को कुछ हजार रुपये का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता है। इन्हीं ‘म्यूल अकाउंट’ के जरिए ठगी की रकम ट्रांसफर कर कुछ ही मिनटों में निकाल ली जाती है, जिससे असली अपराधी बच निकलते हैं और निर्दोष लोग कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ जाते हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी से कमाई गई रकम का बड़ा हिस्सा ब्राउन शुगर, सट्टेबाजी और अन्य अवैध गतिविधियों में खर्च हो रहा है, जिससे युवाओं का भविष्य भी अंधकार की ओर बढ़ रहा है।
पूर्वी सिंहभूम पुलिस और सीआईडी ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी, संदिग्ध लिंक या APK फाइल पर भरोसा न करें और अपना बैंक खाता, एटीएम या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराकर नजदीकी थाना एवं बैंक को तत्काल सूचना दें।

