लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर को महानगरपालिका घोषित करे सरकार, यह मांग जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से प्रमुखता से उठाई है। उन्होंने दिसंबर माह में आहूत विधानसभा सत्र से पूर्व इस आशय की अधिसूचना जारी करने का आग्रह किया है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 243ZE के अनुरूप महानगर योजना समिति का गठन कर जमशेदपुर सहित आसपास के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के एकीकृत विकास पर बल दिया है।
जमशेदपुर को महानगरपालिका घोषित करे: एकीकृत विकास की आवश्यकता
विधायक सरयू राय ने स्पष्ट किया कि जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति, मानगो, जुगसलाई, आदित्यपुर तथा बागबेड़ा, सुंदरनगर और गोविंदपुर सहित आसपास के क्षेत्रों को एकीकृत विकास योजना के दायरे में लाना अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार, इस एकीकरण से पेयजल, बिजली, सफाई, आधारभूत संरचना, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण सुधार के कार्यों में बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा। वर्तमान में ये निकाय अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों के रूप में कार्य कर रहे हैं, जिससे विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में दोहराव और संसाधनों का अपव्यय होता है।
पूर्व में उठाया गया था मामला
सरयू राय ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने 5 अगस्त 2022 को विधानसभा में गैर-सरकारी संकल्प प्रस्तुत किया था। उस समय सरकार ने निर्वाचित निकायों के अभाव में महानगर योजना समिति के गठन में आने वाली संवैधानिक बाधाओं का उल्लेख किया था। हालांकि, अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। मानगो, जुगसलाई, आदित्यपुर और कपाली में नगर निकायों के चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति के स्थान पर औद्योगिक समिति गठित करने का आदेश भी जारी किया जा चुका है।
इस प्रकार, सरकार के समक्ष पूर्व में बताई गईं तकनीकी एवं संवैधानिक बाधाएं अब लगभग समाप्त हो चुकी हैं। चूंकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास नगर विकास विभाग का दायित्व भी है, इसलिए इस दिशा में शीघ्र निर्णय लिया जाना संभव है। सरयू राय ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि दिसंबर में विधानसभा सत्र से पहले अधिसूचना जारी नहीं हुई, तो वे इस मुद्दे को सदन में पुरजोर तरीके से पुनः उठाएंगे।
महानगर योजना समिति का संवैधानिक प्रावधान
संविधान के अनुच्छेद 243ZE में दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले महानगरीय क्षेत्रों के लिए महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee) गठित करने का प्रावधान है। इस समिति का उद्देश्य महानगरीय क्षेत्र के समग्र विकास के लिए मसौदा विकास योजना तैयार करना होता है। जमशेदपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों की सम्मिलित जनसंख्या इस मानक को पूरा करती है, फिर भी लंबे समय से इस संवैधानिक प्रावधान को लागू नहीं किया जा सका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समिति के गठन से क्षेत्रीय असंतुलन दूर होगा और योजनाबद्ध शहरीकरण को गति मिलेगी।
सरयू राय ने इस बात पर जोर दिया कि एकीकृत कमान के अभाव में वर्तमान में जलापूर्ति, सीवरेज, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और यातायात प्रबंधन जैसी आवश्यक सेवाएं खंडित तरीके से संचालित हो रही हैं। महानगरपालिका का गठन इन सेवाओं को एकल प्राधिकरण के अधीन लाएगा, जिससे नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने औद्योगिक नगरी होने के नाते जमशेदपुर की विशिष्ट आवश्यकताओं का भी हवाला दिया, जहां पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण के लिए समन्वित प्रयास अपरिहार्य हैं।
इस मांग को लेकर स्थानीय नागरिक समाज और विभिन्न राजनीतिक दलों में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा सत्र में यह मुद्दा प्रमुखता से गूंजेगा। सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन नगर विकास विभाग के सूत्रों का कहना है कि प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर भी शहरी विकास संबंधी नीतियों की जानकारी उपलब्ध है।
भविष्य की रूपरेखा
यदि सरकार इस मांग को स्वीकार कर लेती है, तो जमशेदपुर झारखंड का पहला ऐसा औद्योगिक शहर होगा जिसे महानगरपालिका का दर्जा प्राप्त होगा। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि केंद्रीय योजनाओं जैसे अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन और स्वच्छ भारत मिशन के तहत निधि प्राप्त करने की पात्रता भी सुदृढ़ होगी। सरयू राय का यह कदम क्षेत्र के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें दिसंबर के विधानसभा सत्र और उससे पहले सरकार के फैसले पर टिकी हैं।

