जादूगोड़ा में ऑनलाइन जुआ का फैलता साम्राज्य
जादूगोड़ा में ऑनलाइन जुआ का नेटवर्क इस कदर फैल चुका है कि कई लोग रातों-रात करोड़पति बन गए हैं। पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा थाना क्षेत्र में ऑनलाइन सट्टेबाजी का यह काला कारोबार राधे एक्सचेंज और बिग रॉक एक्सचेंज जैसे नामों से संचालित हो रहा है। स्थानीय सूत्रों की मानें तो जुए के काले पैसे से क्षेत्र में कई बड़ी-बड़ी दुकानें खुल गई हैं, आलीशान घर बन गए हैं और महंगी गाड़ियां आ गई हैं। अब इस पूरे अवैध कारोबार पर पुलिस कप्तान की नजर टेढ़ी हो गई है और बहुत जल्द बड़े रैकेट के खुलासे की संभावना प्रबल हो गई है।
मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर पहुंचा सट्टे का जाल
जादूगोड़ा क्षेत्र में ऑनलाइन जुए के खेल इन दिनों चरम पर हैं। एक स्थानीय युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ लोगों द्वारा ऑनलाइन आईडी बनाकर युवाओं समेत अन्य लोगों को इस खेल से जोड़ा जा रहा है। तरीका बेहद आसान और खतरनाक है – पहले लोगों की ऑनलाइन आईडी बनाई जाती है, फिर उस आईडी में नकद राशि जमा कराकर खेल शुरू कराया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए ‘आरताई’ (Aartai) नामक मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह ऐप प्ले स्टोर पर उपलब्ध है और इसी के माध्यम से खेल और लाखों-करोड़ों के लेन-देन की प्रक्रिया संचालित हो रही है। मोबाइल के माध्यम से घर बैठे पैसा लगाने की सुविधा होने के कारण इसकी पहुंच गांव-गांव तक हो गई है।
शहर-शहर में एजेंट, दुकान की आड़ में धंधा
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस नेटवर्क के संचालकों ने अलग-अलग शहरों और कस्बों में अपने एजेंट नियुक्त कर रखे हैं। ये एजेंट चाय दुकान, पान दुकान और मोबाइल रिचार्ज की दुकानों की आड़ में लोगों को ऑनलाइन आईडी उपलब्ध कराने, रकम जमा कराने तथा नए लोगों को जोड़ने का काम करते हैं। कमीशन के लालच में कई युवा भी इस नेटवर्क से जुड़ गए हैं, जो अपने साथियों को भी इस दलदल में धकेल रहे हैं। जादूगोड़ा, राखामाइंस, गालुडीह सहित आसपास के इलाकों में यह नेटवर्क बड़ी तेजी से अपने पांव पसार चुका है।
जुए के पैसे से बनी अकूत संपत्ति, लिखित शिकायतें भी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी से जुड़े कई लोगों ने कुछ ही महीनों में अकूत संपत्ति बना ली है। इनकी आय का कोई वैध स्रोत नहीं होने के बावजूद इनकी संपत्ति में हुई बेतहाशा वृद्धि से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। कई जगहों पर स्थानीय लोगों द्वारा थाना और वरीय अधिकारियों को लिखित शिकायत भी दी गई है। शिकायतों में साफ तौर पर कहा गया है कि जुए के पैसे से बड़ी दुकानें, मकान और लग्जरी गाड़ियां खरीदी गई हैं, जिसकी जांच बेहद जरूरी है।
कम रकम का लालच, फिर बर्बादी की कहानी
इस खेल का सबसे बड़ा जाल कम रकम से शुरू होता है। कम समय में अधिक पैसा कमाने का लालच लोगों को अपनी ओर खींचता है। शुरुआत में 500-1000 रुपये लगाने वाले लोग धीरे-धीरे 50 हजार से लाखों तक लगा देते हैं। हारने के बाद नुकसान की भरपाई के लिए दोबारा पैसा लगाते हैं और इसी चक्कर में अपनी पूरी जमा पूंजी, जेवर तक गंवा बैठते हैं। इसका सबसे अधिक असर युवाओं पर पड़ रहा है। मोबाइल पर खेल होने से परिवार को लंबे समय तक पता भी नहीं चलता और जब तक पता चलता है, तब तक लाखों का नुकसान हो चुका होता है। कई परिवार इस लत के कारण आर्थिक संकट में फंस चुके हैं।
एसएसपी ने कहा – टीम गठित, होगी सख्त कार्रवाई
“इस मामले को गंभीरता से लेकर ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच की जाएगी। जिन जगहों पर जमावड़ा होकर फोन पर यह खेल खेला जाता है, वहां छापेमारी कर पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।”
पुलिस सूत्रों की मानें तो एसपी इस मामले को लेकर बेहद गंभीर हैं। ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में बनी टीम जल्द ही तकनीकी साक्ष्य और लोकल इनपुट के आधार पर बड़े पैमाने पर छापेमारी कर सकती है। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे ऐसे किसी भी ऑनलाइन सट्टेबाजी के खेल से दूर रहें और इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। साइबर अपराध से जुड़े ऐसे मामलों की शिकायत के लिए आप राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी संपर्क कर सकते हैं।
निष्कर्ष: सतर्कता ही बचाव
जादूगोड़ा में सामने आया यह मामला पूरे झारखंड के लिए एक चेतावनी है। ऑनलाइन जुए की लत न केवल आर्थिक रूप से बर्बाद करती है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर देती है। पुलिस की आगामी कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इस रैकेट के सरगनाओं को गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाई जाएगी, ताकि युवा पीढ़ी को इस दलदल में फंसने से बचाया जा सके।

