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    सीआईआई सेफ्टी टॉक 2026: अनुपालन से आगे बढ़कर सुरक्षा संस्कृति विकसित करने पर जोर

    Devanand SinghBy Devanand SinghOctober 26, 2026No Comments3 Mins Read
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    सीआईआई सेफ्टी टॉक 2026
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    जमशेदपुर में सोमवार को सीआईआई सेफ्टी टॉक 2026 के सातवें संस्करण का भव्य शुभारंभ हुआ, जहां भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) झारखंड ने औद्योगिक सुरक्षा को महज नियामकीय अनुपालन की सीमा से निकालकर एक सशक्त सुरक्षा संस्कृति के रूप में स्थापित करने का आह्वान किया। दो दिवसीय इस सम्मेलन एवं प्रदर्शनी में देशभर के उद्योग जगत के प्रमुखों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए नेतृत्व की जवाबदेही और तकनीकी नवाचार को अनिवार्य बताया।

    सीआईआई सेफ्टी टॉक 2026 में नेतृत्व की जवाबदेही पर चर्चा

    कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में सीआईआई पूर्वी क्षेत्र सुरक्षा उपसमिति के अध्यक्ष एवं टाटा स्टील के सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्थिरता उपाध्यक्ष राजीव मंगल ने कहा कि कार्यस्थल पर सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक मूल्य होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि “नेतृत्व की जवाबदेही” ही वह आधारशिला है जिस पर शून्य-दुर्घटना का लक्ष्य टिका होता है। जब शीर्ष प्रबंधन सुरक्षा को उत्पादन और व्यावसायिक लक्ष्यों से ऊपर रखता है, तभी जमीनी स्तर पर व्यवहारिक परिवर्तन संभव होता है।

    सीआईआई झारखंड राज्य परिषद के अध्यक्ष दिलू पारिख ने अपने संबोधन में बताया कि इस वर्ष का विषय “अनुपालन से संस्कृति की ओर” वर्तमान औद्योगिक परिदृश्य की सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को मजबूत करना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि संसाधनों की कमी के बावजूद उन्हें बड़े उद्योगों के समान मानक पूरे करने होते हैं। उपाध्यक्ष डीबी सुंदर रामम ने प्रक्रिया सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन के एकीकृत दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल निगरानी बने गेम चेंजर

    सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल निगरानी और आधुनिक इंजीनियरिंग नियंत्रणों के उपयोग पर गहन मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे एआई-आधारित वीडियो एनालिटिक्स असुरक्षित कार्यों और परिस्थितियों की वास्तविक समय में पहचान कर सकता है। मुख्य सुरक्षा अधिकारी नीरज कुमार सिन्हा ने महत्वपूर्ण जोखिमों की पहचान के लिए डेटा एनालिटिक्स के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स दुर्घटना होने से पहले ही संभावित खतरे का पूर्वानुमान लगा सकता है, जिससे निवारक कार्रवाई का समय मिल जाता है।

    टाटा स्टील यूआईएसएल के प्रबंध निदेशक अतुल भटनागर ने शहरी औद्योगिक परिवेश में सड़क सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन की चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित जोखिम नियंत्रण केवल बड़े संयंत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे आपूर्ति श्रृंखला के हर स्तर तक पहुंचाया जाना चाहिए। इस संदर्भ में, भारतीय उद्योग परिसंघ की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध दिशानिर्देश एमएसएमई के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं।

    प्रमुख विषयगत सत्र और प्रदर्शनी

    दो दिवसीय आयोजन के एजेंडे में पांच प्रमुख विषयों पर केंद्रित सत्र शामिल हैं:

    • ऊंचाई पर काम करना: गिरने से सुरक्षा के नए मानक और उपकरण।
    • प्रक्रिया सुरक्षा: रासायनिक एवं भारी उद्योगों में विफलता-मुक्त संचालन।
    • सड़क सुरक्षा: संयंत्र परिसर के अंदर और बाहर परिवहन प्रबंधन।
    • तकनीक आधारित जोखिम नियंत्रण: आईओटी, वियरेबल्स और ड्रोन का सुरक्षा ऑडिट में उपयोग।
    • एमएसएमई में सुरक्षा व्यवस्था: कम लागत वाले प्रभावी सुरक्षा मॉडल।

    सम्मेलन में 250 से अधिक प्रतिनिधियों और 50 से अधिक प्रदर्शकों ने भाग लिया। प्रदर्शनी में अग्निशमन उपकरण, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई), गैस डिटेक्शन सिस्टम और सुरक्षा प्रशिक्षण सिमुलेटर जैसे नवाचार प्रदर्शित किए गए। प्रतिभागियों ने स्टॉल्स पर जाकर नई तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन देखा और विक्रेताओं से सीधा संवाद किया।

    सुरक्षा संस्कृति: एक सतत यात्रा

    समापन सत्र की पूर्व संध्या पर वक्ताओं ने सर्वसम्मति से माना कि सुरक्षा संस्कृति विकसित करना एक बार का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली यात्रा है। इसके लिए प्रशिक्षण, संवाद, रिपोर्टिंग संस्कृति और जांच प्रणाली को संस्थागत बनाना होगा। राजीव मंगल ने अंत में कहा, “सुरक्षा में निवेश खर्च नहीं, बल्कि मानव पूंजी और व्यावसायिक निरंतरता की गारंटी है।” इस आयोजन ने झारखंड के औद्योगिक परिदृश्य में सुरक्षा संवाद को नई दिशा दी है।

    औद्योगिक सुरक्षा सीआईआई सेफ्टी टॉक सुरक्षा संस्कृति
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