हाथी-मानव संघर्ष रोकने हेतु एआई तकनीक की पहल सराहनीय, लुगाहारा एवं आसपास के क्षेत्रों में भी कैमरे लगाने की मांग
राष्ट्र संवाद संवादाता
भाजपा नेता चुनु माहाली ने वन विभाग से की अपील
पूर्वी सिंहभूम सहित झारखंड के विभिन्न वन क्षेत्रों में बढ़ते हाथी-मानव संघर्ष को नियंत्रित करने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा एआई तकनीक आधारित स्मार्ट कैमरा सिस्टम लगाने की पहल को क्षेत्र के लोगों ने सराहनीय कदम बताया है। भाजपा नेता चुनु माहाली ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए वन विभाग से मांग की है कि चाकुलिया रेंज के दारिशोल बीट अंतर्गत लुगाहारा, दुधकुण्डी, लोधनबनी, पानीशोल एवं धोडांरी जैसे संवेदनशील गांवों के साथ-साथ मानुषमुड़िया बीट के धानघोरी, मांगड़ोशोल, सोनाकड़ा, भादुआ और बेनाशोली गांवों में भी अत्याधुनिक एआई कैमरे शीघ्र स्थापित किए जाएं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जंगली हाथियों का लगातार ग्रामीण क्षेत्रों की ओर रुख करना गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। हाथियों के झुंड द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने, घरों को क्षति पहुंचाने तथा ग्रामीणों की जान-माल को खतरा पहुंचाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में वन विभाग द्वारा चाकुलिया वन क्षेत्र, दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी एवं सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल क्षेत्र में 26 एआई कैमरे स्थापित करने का निर्णय अत्यंत स्वागतयोग्य एवं दूरदर्शी पहल है।
चुनु माहाली ने कहा कि दारिशोल एवं मानुषमुड़िया बीट के कई गांव लंबे समय से हाथियों के आतंक से प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में ग्रामीण भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। विशेष रूप से रात के समय हाथियों के गांवों में प्रवेश करने से दुर्घटनाओं और जान-माल की क्षति की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने बताया कि एआई तकनीक से लैस स्मार्ट कैमरे हाथियों की गतिविधियों पर 24 घंटे निगरानी रखेंगे। जैसे ही कोई हाथी कैमरे की रेंज में आएगा, सिस्टम स्वतः सायरन बजाकर ग्रामीणों एवं वन विभाग को सतर्क करेगा। इससे लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जाने का अवसर मिलेगा तथा संभावित दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
भाजपा नेता ने वन विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया कि जिन क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही अधिक है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कैमरे लगाए जाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग से हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी तथा ग्रामीणों को सुरक्षा और राहत मिलेगी।

