हेमंत सरकार हर मोर्चे पर नाकाम, झामुमो–कांग्रेस ने की सौदेबाजी, संघर्ष किया आजसू ने: प्रवीण प्रभाकर
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर – आजसू पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि हेमंत सरकार प्रत्येक मोर्चे पर पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य आजसू के संघर्ष का परिणाम है जबकि झामुमो–कांग्रेस सौदेबाजी में लगी रही। अगर इनकी नीयत साफ होती तो 1993 में ही अलग राज्य का निर्माण हो सकता था।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए श्री प्रभाकर ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था बदतर हो चुकी है और विकास कार्य ठप हैं। विगत चार महीनों से विकास योजनाओं पर कोई खर्च नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार मइया योजना के पैसे को जोड़ने में व्यस्त है और जानबूझकर नगर निकाय चुनावों में देरी कर रही है।

उन्होंने कहा कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सरकार को तुरंत पहल करनी चाहिए। ट्रिपल टेस्ट करवाने में भी गड़बड़ियां हो रही हैं। श्री प्रभाकर ने स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मरीजों को खाट पर ढोना पड़ रहा है, जबकि सरकार अटल क्लिनिक का नाम बदलकर मदर टेरेसा के नाम पर करने में व्यस्त है। यह दोनों महान हस्तियों का अपमान है।

इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार ने पहली बार 1989 में आजसू से वार्ता की थी। 1998 में जब लालू यादव ने कहा कि झारखंड मेरी लाश पर बनेगा, तब झामुमो ने विरोध में कोई कदम नहीं उठाया। आजसू ने 21 सितंबर 1998 को झारखंड बंद का आह्वान किया जिसे जबरदस्त जनसमर्थन मिला।

1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने आजसू से वार्ता की थी। केंद्रीय गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने वनांचल की बजाय झारखंड नामकरण करने और अलग राज्य निर्माण के आजसू के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। प्रेस वार्ता में केंद्रीय मीडिया संयोजक परवाज खान, जिला वरीय उपाध्यक्ष संजय सिंह, प्रवक्ता अप्पू तिवारी, देवाशीष चट्टोराज, अभय सिंह समेत अन्य उपस्थित थे।


