सोना देवी विश्वविद्यालय में हिंदी पखवाड़ा-2026 का भव्य समापन
हिंदी भारतीय अस्मिता, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा की सशक्त वाहक : कुलाधिपति प्रभाकर सिंह
राष्ट्र संवाद संवाददाता
घाटशिला। सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में आयोजित हिंदी पखवाड़ा-2026 का भव्य समापन सोमवार को विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में समारोह-सह-संगोष्ठी के रूप में हुआ। कार्यक्रम में हिंदी के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महत्व के साथ शिक्षा, प्रशासन, पत्रकारिता, तकनीक, शोध, कार्यालयीन कार्य और आधुनिक संचार माध्यमों में हिंदी की बढ़ती उपयोगिता एवं संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता, संस्कृति, संस्कार और ज्ञान-परंपरा की सशक्त वाहक है। उन्होंने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में हिंदी के सामने अवसरों की कमी नहीं है। आवश्यकता है कि नई पीढ़ी हिंदी को आधुनिक तकनीक, डिजिटल माध्यम, विज्ञान, शोध और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जोड़कर इसे ज्ञान-सृजन की प्रभावी भाषा बनाए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना, दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन से हुआ। इसके बाद संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता चौधरी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों को विश्वविद्यालय की ओर से अंगवस्त्र, पौधा एवं श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि हिंदी को केवल पाठ्यक्रम अथवा साहित्य तक सीमित रखने के बजाय जीवन और कार्य-संस्कृति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। शिक्षा, प्रशासन, कार्यालयीन कार्य, शोध, तकनीक और दैनिक व्यवहार में हिंदी का प्रयोग बढ़ने से भाषा अधिक प्रभावी और जनसुलभ बनेगी।
तुलसी भवन, जमशेदपुर के मानद सचिव डॉ. प्रसंजीत तिवारी ने कहा कि भाषा समाज की संस्कृति, परंपरा, स्मृतियों और संवेदनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है। उन्होंने नई पीढ़ी को हिंदी की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का आह्वान किया।

प्रखर पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. विनय कुमार पाण्डे ने हिंदी को आत्मीयता, संस्कार एवं संस्कृति की भाषा बताते हुए कहा कि अपनी भाषा के प्रति सम्मान व्यक्ति को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ता है। वहीं डॉ. जिवेंद्र कुमार पाण्डेय ने पत्रकारिता एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति में हिंदी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से हिंदी में लेखन और पठन की आदत विकसित करने का आग्रह किया।
दूरदर्शन उद्घोषिका डॉ. सोनम गुप्ता ने आधुनिक संचार माध्यमों में हिंदी की बढ़ती भूमिका पर कहा कि डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों ने हिंदी के विस्तार के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। आज हिंदी पुस्तकों और पारंपरिक माध्यमों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच रही है। वहीं सेवानिवृत्त इंडियन ऑयल प्रबंधक प्रमोद रंजन पाण्डेय ने कार्यालयीन एवं व्यावहारिक जीवन में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने पर जोर दिया।

रांची विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जंग बहादुर पाण्डेय ने “विश्व का तोरणहार है—हिंदी” विषय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने हिंदी की समृद्ध साहित्यिक परंपरा, विशाल शब्द-संपदा, व्यापक जनस्वीकार्यता और वैश्विक उपस्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी ज्ञान, संवेदना, संस्कृति और भारतीय जीवन-दृष्टि की वाहक है। उन्होंने निराला सहित हिंदी साहित्य के महान रचनाकारों की विरासत का उल्लेख करते हुए हिंदी को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
एबीएम कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नरेश कुमार ने हिंदी के शुद्ध लेखन एवं व्याकरण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी में पढ़ने, लिखने और प्रभावी ढंग से अपनी बात रखने का आह्वान किया।
समारोह में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी आकर्षण पैदा किया। डॉ. लता मानकर ने सरस्वती वंदना एवं काव्य पाठ किया। डॉ. रविकांत शुभम् ने खुदीराम बोस एवं स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों को समर्पित राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत काव्य पाठ प्रस्तुत किया। पूनम सिंह वत्सला ने गीत, श्रृंगार एवं गजल के माध्यम से प्रेम, सौहार्द और सामाजिक समरसता का संदेश दिया, जबकि साहिब नंबाजदी ने शायरी के माध्यम से हिंदी की संवेदनशीलता और व्यापकता को अभिव्यक्त किया।
हिंदी पखवाड़ा के दौरान विश्वविद्यालय में विभिन्न साहित्यिक, शैक्षणिक, भाषायी एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समापन समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुआ, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, विद्यार्थी, साहित्यकार, पत्रकार एवं शिक्षाविद् उपस्थित रहे।

