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    Home » सड़क पर पशुओं का जमावड़ा बना मुसीबत, अज्ञात वाहन की चपेट में आकर गाय घायल
    ओड़िशा

    सड़क पर पशुओं का जमावड़ा बना मुसीबत, अज्ञात वाहन की चपेट में आकर गाय घायल

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 1, 2026No Comments3 Mins Read
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    पशुओं का जमावड़ा
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    लेखक: संजय सिन्हा

    बड़बिल तहसील क्षेत्र में पशुओं का जमावड़ा लगातार गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। मुख्य मार्गों और चौक-चौराहों पर आवारा मवेशियों के बसेरा डालने से न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों की जान भी जोखिम में पड़ गई है। स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के चलते यह समस्या दिन-ब-दिन विकराल रूप धारण करती जा रही है, जिसके कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा हो रहा है।

    पशुओं का जमावड़ा से बड़बिल में बढ़ा खतरा

    बड़बिल (ओडिशा)। बड़बिल तहसील क्षेत्र और बोलानी टाउनशिप के मुख्य मार्गों व चौक-चौराहों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। सड़क पर बैठे पशुओं के कारण आए दिन वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं, वहीं कई पशु भी वाहनों की चपेट में आकर घायल हो रहे हैं।

    शुक्रवार की रात बोलानी टाउनशिप स्थित विष्णु मंदिर के समीप मैदान में बैठी एक गाय को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे में गाय घायल हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर विष्णु मंदिर मार्केट के दुकानदारों ने मौके पर पहुंचकर गाय के जख्मों पर प्राथमिक उपचार किया और उसे सड़क से हटाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

    स्थानीय दुकानदारों और लोगों ने बताया कि कई पशुपालक गायों के दूध देने तक उन्हें घर में रखते हैं। दूध देना बंद करने के बाद उन्हें खुले में छोड़ देते हैं। इसके चलते बोलानी के प्रमुख चौक-चौराहों और सड़कों पर दर्जनों गाय-बैल बैठे या विचरण करते नजर आते हैं।

    लोगों के अनुसार सड़क पर पशुओं के बैठे रहने से वाहन चालकों के लिए अचानक दुर्घटना का खतरा बना रहता है। कई बार वाहन चालक घायल होते हैं तो पशु भी वाहनों की चपेट में आ जाते हैं।

    क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से सड़कों पर विचरण करने वाले पशुओं को पकड़कर गौशाला या सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की मांग की है, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लग सके।

    आवारा पशु प्रबंधन में प्रशासनिक चुनौतियां

    ओडिशा सरकार के पशुपालन विभाग के नियमानुसार, नगर निकायों और ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी है कि वे आवारा पशुओं को पकड़कर गौशालाओं या कांजी हाउस में रखें। हालांकि, संसाधनों की कमी और कर्मचारियों के अभाव में यह कार्य प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है। बड़बिल जैसे औद्योगिक क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही अधिक होती है, जिससे रात के अंधेरे में सड़क पर बैठे पशु दिखाई नहीं देते और गंभीर हादसे हो जाते हैं।

    नागरिक सुरक्षा और पशु कल्याण के उपाय

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए पशु मालिकों की जवाबदेही तय करनी होगी। दूध देना बंद करने पर पशुओं को छोड़ देना पशु क्रूरता अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह पशु मालिकों को चिह्नित कर उन पर जुर्माना लगाए और पशुओं को निकटतम गौशाला भेजने की व्यवस्था करे। इसके अलावा, सड़कों पर रिफ्लेक्टर पट्टियां लगाने और स्ट्रीट लाइटों की समुचित व्यवस्था करने से रात के समय दृश्यता बढ़ाई जा सकती है। नागरिक भी ओडिशा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

    जनता की आवाज: त्वरित कार्रवाई की दरकार

    बोलानी टाउनशिप के निवासी रमेश अग्रवाल कहते हैं, “रात को सड़क पर निकलना खतरे से खाली नहीं है। प्रशासन को तुरंत कदम उठाना चाहिए।” वहीं, एक अन्य स्थानीय व्यापारी सुरेश महतो ने बताया कि कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी और नगर पालिका अध्यक्ष से मांग की है कि वे इस दिशा में संवेदनशीलता दिखाएं और पशुओं का जमावड़ा हटाने के लिए विशेष अभियान चलाएं।

    आवारा पशु ओडिशा प्रशासन बड़बिल सड़क हादसा
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