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    Home » कलयुग में सच अकेला चलता है: झूठ की बारात और सच का अकेला सफर
    मेहमान का पन्ना संपादकीय

    कलयुग में सच अकेला चलता है: झूठ की बारात और सच का अकेला सफर

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 1, 2026No Comments3 Mins Read
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    कलयुग में सच अकेला चलता है
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    लेखक: इंद्र यादव

    कलयुग में सच अकेला चलता है, झूठ धूमधाम से निकलता है

    कलयुग में सच अकेला चलता है

    भाई, एक सीधी बात समझ लो। झूठे आदमी से बहस मत करो। उसके मुंह मत लगो। साबित करने की कोशिश मत करो। तुम कभी नहीं जीत पाओगे।

    क्यों? क्योंकि यह कलयुग है। यहां नियम ही अलग हैं।

    यहां सच अकेला सड़क पर चलता है। सिर झुकाए। चुपचाप। कोई उसके साथ नहीं चलता। कोई ताली नहीं बजाता। लोग उसे अनदेखा कर देते हैं।

    और झूठ! झूठ बारात लेकर निकलता है। ढोल बजते हैं। लोग नाचते हैं। भीड़ इकट्ठी हो जाती है। सब तालियां बजाते हैं। झूठ को राजा बना देते हैं।

    अब सोचो, ऐसे में तुम झूठे से बहस करोगे तो क्या होगा!

    तुम सच बोलोगे। साफ-साफ। सबूत दोगे। तर्क दोगे। लेकिन वह सुनता ही नहीं। वह अपनी बात पर अड़ा रहता है। एक झूठ पकड़ा तो दूसरा झूठ निकाल लेता है। एक बात काट दी तो दूसरी बात बना लेता है। वह शर्म नहीं मानता। वह सही-गलत नहीं देखता। उसे सिर्फ अपनी जीत चाहिए।

    तुम थक जाओगे। गुस्सा आ जाएगा। मन खराब हो जाएगा। और वह मुस्कुराता रहेगा। क्योंकि उसके लिए यह खेल है। तुम्हारे लिए यह तकलीफ है।

    कलयुग में यही होता है। यहां जो ज्यादा बोलता है, वही सही माना जाता है। जो शोर मचाता है, वही जीत जाता है। जो चुप रहता है, उसे कमजोर समझा जाता है। यहां संख्या मायने रखती है, सच नहीं। यहां ताकत मायने रखती है, सही बात नहीं।

    रोजमर्रा की जिंदगी में देखो। कोई झूठ बोल रहा है। तुम सच्चाई बताते हो। वह पलटकर तुम पर ही आरोप लगा देता है। भीड़ उसके साथ हो जाती है। तुम अकेले पड़ जाते हो। फिर तुम सोचते हो—मैंने गलत क्या कहा? कुछ नहीं। बस तुम सच बोल रहे थे। और सच बोलने की सजा यही है कि लोग तुम्हें छोड़ देते हैं।

    इतिहास में भी ऐसा ही हुआ है। कई अच्छे लोग सच बोले। उन्हें अकेला छोड़ दिया गया। झूठे लोगों ने उन्हें बुरा कहा। पागल कहा। दुश्मन कहा। भीड़ उनके पीछे हो ली। लेकिन समय बदला तो सच निकल आया। झूठ की बारात बिखर गई। जो लोग तालियां बजा रहे थे, वे चुप हो गए।

    फिर भी रोज की जिंदगी में झूठे से भिड़ना बेकार है। वे बहस नहीं करते। वे लड़ाई लड़ते हैं। वे बात नहीं मानते। वे हर बात को तोड़-मरोड़ देते हैं। तुम अपनी ताकत बर्बाद करोगे। अपना समय बर्बाद करोगे। अपना मन खराब करोगे। और अंत में कुछ नहीं मिलेगा।

    इसलिए सबसे अच्छी बात यही है—झूठे के पास मत जाओ। उसके मुंह मत लगो। दूर रहो। अपनी जगह पर खड़े रहो। अपना काम करो। जहां जरूरी हो, वहां सच बोलो। लेकिन हर झूठे से लड़ने की जरूरत नहीं।

    कलयुग में सच अकेला जरूर चलता है। लेकिन वह टिकता है। वह मजबूत होता है। झूठ की बारात भले ही आज शोर मचा रही हो, कल वह खत्म हो जाती है। एक दिन सच्चाई अपना रास्ता खुद बना लेती है। लोग फिर सच की तरफ आने लगते हैं।

    झूठे लोगों से बहस जीतने की कोशिश मत करो। यह जीतने का खेल नहीं है। यह समय और ताकत बर्बाद करने का खेल है। और समय सबसे कीमती चीज है।

    सच बोलो। काम करो। और झूठे लोगों को उनके झूठ के साथ छोड़ दो। वे अपनी बारात में व्यस्त रहें। तुम अपने रास्ते पर चलते रहो।

    यही समझदारी है। यही शांति है। यही असली ताकत है। कलयुग की अवधारणा पर अधिक पढ़ें।

    कलयुग जीवन दर्शन झूठ प्रेरणा
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