
लेखक: राष्ट्र संवादसंवाददाता
विश्व में एकाकी अध्यात्म देश भारत है, जहां पर परिक्रमा के पग पग पर अश्वमेध यज्ञ होता है। यह विचार स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने सिमरिया काली धाम स्थित सर्वमंगला अध्यात्म योग विद्यापीठ के ज्ञान मंच से व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत भूमि अध्यात्म की जननी है और यहाँ की गई आध्यात्मिक यात्राएं भक्तों को अलौकिक फल प्रदान करती हैं।
विश्व में एकाकी अध्यात्म देश भारत है
राजकीय सिमरिया कल्पवास मेला क्षेत्र में पहली परिक्रमा गुरुवार को अत्यंत भव्यता के साथ संपन्न हुई। सर्वमंगला अध्यात्म योग विद्यापीठ, सर्वमंगला आश्रम सिमरिया काली धाम से घोड़ा, ऊंट, बैंड-बाजा, ध्वज और पताकाओं के साथ एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई। स्वामी चिदात्मन जी महाराज की अगुवाई में साधु-संतों, आश्रम के पदाधिकारियों, तथा बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया।
परिक्रमा मार्ग पर वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया था। श्रद्धालुओं के हाथ में तील, जौ और अरवा चावल थे, जिन्हें वे रास्ते में बिखेरते हुए चल रहे थे। हर कोई ‘गोविन्द हरे, गोपाल हरे’ का जयघोष कर रहा था। यह यात्रा आश्रम से शुरू होकर कल्पवास मेला क्षेत्र से होते हुए राम घाट तक गई और पुनः सर्वमंगला आश्रम पर समाप्त हुई।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था
इस भव्य आयोजन की सुरक्षा के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क था। इस दौरान एडीएम ब्रजकिशोर चौधरी, नप बीहट कार्यपालक पदाधिकारी अवनीश कुमार, बरौनी सीओ हेमंत अंकुर, आरओ राम विनोद ठाकुर, नप बीहट के उप मुख्य पार्षद ऋषिकेश कुमार और चकिया थानाध्यक्ष गौतम कुमार दास सहित भारी संख्या में पुलिस बल तैनात थे।
अश्वमेध यज्ञ और कुंभ का महत्व
ज्ञान मंच से स्वामी जी ने बताया कि सिमरिया धाम में की गई परिक्रमा का महत्व अश्वमेध यज्ञ के समान है। उन्होंने कहा कि भारत में द्वादश कुंभ स्थली का विशेष महत्व है। उन्होंने बिहार सरकार से आग्रह किया कि जिस प्रकार प्रयाग में कुंभ की व्यवस्था होती है, उसी तरह सिमरिया धाम में भी श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने परिक्रमा मार्ग को दुरुस्त करने और मेले को और अधिक व्यवस्थित करने पर जोर दिया।
स्वामी जी ने घोषणा की कि 12 नवंबर को द्वितीय एवं 20 नवंबर को तीसरी परिक्रमा आयोजित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 2029 ईस्वी में सिमरिया धाम में महाकुंभ के आयोजन की बात कही। इस कार्यक्रम में रविन्द्र ब्रह्मचारी जी, केंद्रीय समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद सिंह, सचिव दिनेश प्रसाद सिंह, कोषाध्यक्ष नवीन प्रसाद सिंह, प्रोफेसर प्रेम और मीडिया प्रभारी नीलमणि सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को भी वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का एक प्रयास है। सिमरिया की पावन भूमि पर श्रद्धालुओं का उमड़ता जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति और अध्यात्म आज भी युवाओं और बुजुर्गों के लिए समान रूप से प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। आगामी आयोजनों को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

