लेखक: संजय सिन्हा
बड़बिल (ओडिशा)। बड़बिल तहसील क्षेत्र और बोलानी टाउनशिप के मुख्य मार्गों व चौक-चौराहों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। सड़क पर बैठे पशुओं के कारण आए दिन वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं, वहीं कई पशु भी वाहनों की चपेट में आकर घायल हो रहे हैं।
आवारा पशुओं का जमावड़ा से बढ़ रहीं दुर्घटनाएं
शुक्रवार की रात बोलानी टाउनशिप स्थित विष्णु मंदिर के समीप मैदान में बैठी एक गाय को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे में गाय घायल हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर विष्णु मंदिर मार्केट के दुकानदारों ने मौके पर पहुंचकर गाय के जख्मों पर प्राथमिक उपचार किया और उसे सड़क से हटाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
आवारा पशुओं का जमावड़ा के पीछे का कारण
स्थानीय दुकानदारों और लोगों ने बताया कि कई पशुपालक गायों के दूध देने तक उन्हें घर में रखते हैं। दूध देना बंद करने के बाद उन्हें खुले में छोड़ देते हैं। इसके चलते बोलानी के प्रमुख चौक-चौराहों और सड़कों पर दर्जनों गाय-बैल बैठे या विचरण करते नजर आते हैं।
लोगों के अनुसार सड़क पर पशुओं के बैठे रहने से वाहन चालकों के लिए अचानक दुर्घटना का खतरा बना रहता है। कई बार वाहन चालक घायल होते हैं तो पशु भी वाहनों की चपेट में आ जाते हैं।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से सड़कों पर विचरण करने वाले पशुओं को पकड़कर गौशाला या सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की मांग की है, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लग सके।
प्रशासनिक उदासीनता और नागरिकों की मांग
बड़बिल क्षेत्र में आवारा पशुओं का जमावड़ा लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर पालिका और जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। बोलानी टाउनशिप के मुख्य चौराहों पर शाम ढलते ही दर्जनों गाय-बैल सड़क पर डेरा जमा लेते हैं, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी होती है।
सामाजिक कार्यकर्ता रमेश चंद्र महंती का कहना है कि “पशुपालकों की लापरवाही और प्रशासन की अनदेखी के चलते आम जनता खतरे में है। हर सप्ताह कोई न कोई हादसा होता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है।” उन्होंने मांग की कि आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए और दोषी पशुपालकों पर जुर्माना लगाया जाए।
सड़क सुरक्षा के उपाय और सरकारी दिशानिर्देश
सड़क सुरक्षा के मानकों के अनुसार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने आवारा पशुओं को सड़कों से हटाने के दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों में नगर निकायों को पशु पकड़ने वाले दस्ते गठित करने, गौशालाओं की क्षमता बढ़ाने और पशुपालकों को जागरूक करने के निर्देश शामिल हैं।
ओडिशा सरकार ने भी मुख्यमंत्री गौशाला योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक में गौशाला निर्माण का लक्ष्य रखा है, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन धीमा है। बड़बिल तहसील में अभी तक कोई आधुनिक गौशाला नहीं बनी है, जिससे पकड़े गए पशुओं को रखने की समस्या बनी रहती है।
भविष्य की राह: सामुदायिक भागीदारी जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई से समस्या हल नहीं होगी। इसमें स्थानीय समुदाय, पशुपालक और स्वयंसेवी संगठनों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। बोलानी मार्केट के दुकानदारों द्वारा घायल गाय का इलाज करना सराहनीय पहल है, लेकिन इसे संस्थागत रूप देने की जरूरत है।
नागरिकों का सुझाव है कि हर वार्ड में “पशु मित्र” समूह बनाए जाएं जो आवारा पशुओं की निगरानी करें और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में मदद करें। साथ ही, दूध देना बंद करने वाली गायों को छोड़ने वाले पशुपालकों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

