*चांडिल में प्रस्तावित 66 मेगावाट पावर प्लांट के लिए लिए गए ऋण के कथित डायवर्जन की जांच*
मृत्युंजय बर्मन
राष्ट्र संवाद (कोल्हान प्रभारी)
करीब 290 करोड़ रुपये के कथित बैंक लोन फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को कोलकाता में कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 11 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई में कंपनी के प्रमोटर प्रशांत बोथरा और विजय बोथरा के अलावा अन्य निदेशकों, ऑडिटर्स तथा उनसे जुड़े कार्यालयों को भी शामिल किया गया। यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत चल रही जांच का हिस्सा बताई गई है।
इडी अधिकारियों के अनुसार, कोहिनूर पावर ने झारखंड में 66 मेगावाट क्षमता का पावर प्लांट स्थापित करने के लिए बैंकों से ऋण लिया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि ऋण से प्राप्त रकम का निर्धारित परियोजना में इस्तेमाल करने के बजाय अन्य ग्रुप कंपनियों और कथित निजी उद्देश्यों की ओर डायवर्ट किया गया। एजेंसी अब इसी कथित फंड डायवर्जन और रकम की मनी ट्रेल की पड़ताल कर रही है।
जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक कंपनी बाद में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया में गई। परिसमापन के दौरान करीब सात करोड़ रुपये ही बरामद/रिकवर किए जा सके, जबकि ऋणदाताओं को कथित तौर पर भारी नुकसान हुआ। इडी की मौजूदा कार्रवाई का उद्देश्य मामले से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्य जुटाने और बैंक से निकली रकम के अंतिम इस्तेमाल का पता लगाना बताया गया है।
उपलब्ध आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार गुरुवार की तलाशी कोलकाता के 11 परिसरों में हुई है। चांडिल का संबंध उस पावर प्लांट परियोजना से है, जिसके लिए कथित तौर पर बैंक ऋण लिया गया था। इडी की जांच अभी जारी है। तलाशी के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल एजेंसी के आरोप जांच के दायरे में हैं और संबंधित पक्षों का अंतिम दोष अदालत में तय होना है।

