टाटा स्टील का बोनस समझौता हुआ
25,603 कर्मचारियों के बीच वितरित होंगे 315 करोड़ रुपये
कर्मचारियों के बैंक खाते में 11 सितम्बर को जाएगी राशि
कंपनी के इतिहास का सबसे अधिकतम बोनस
ओल्ड सीरीज को अधिकतम 4,52,512 रूपये,
न्यू सीरीज कर्मचारियों को 1,28,448 रूपये
कर्मचारियों का औसत बोनस 1,48,675 रूपये
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। टाटा स्टील प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच वित्तीय वर्ष 2025-26 के वार्षिक बोनस को लेकर गुरुवार को समझौता संपन्न हो गया। समझौते के तहत टाटा स्टील के भारत स्थित विभिन्न परिचालनों में कार्यरत 25,603 पात्र कर्मचारियों के बीच कुल 315 करोड़ रुपये बोनस के रूप में वितरित किए जाएंगे।

टाटा स्टील के एमडी सह सीइओ टीवी नरेंद्रन और टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नू समेत अन्य पदाधिकारियों के बीच समझौता पर हस्ताक्षर किया गया. इस दौरान झारखंड सरकार की ओर से उपश्रमायुक्त अरविंद कुमार मौजूद थे.
तय फार्मूला के तहत कर्मचारियों को कुल 304 करोड़ ही बोनस के मद में मिलने वाला था. इसी बीच टाटा स्टील के एमडी के साथ टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नू की वार्ता हुई. इसके बाद यह राशि बढ़ाई गईं.
तय फार्मूला में प्रोडक्टिविटी पर लगी सीलिंग को मैनेजमेंट ने तोड़ा और इस मद में 90 करोड़ की जगह 100 करोड रुपए का भुगतान करने का ऐलान मैनेजमेंट ने कर दिया. इसके बाद भी बोनस की राशि 314.53 करोड रुपए हो रही थी. इस राशि को फिर राउंड ऑफ कर 315 करोड़ तक लाया गया. बोनस की राशि 25603 कर्मचारियों के बीच बांटा जाएगा. इसमें टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में कुल 11021 कर्मचारियों के बीच बोनस की राशि बांटी जाएगी. इसमें टाटा स्टील ग्रोथ शॉप, टिनप्लेट, तार कंपनी, टाटा स्टील कलिंगनगर, टाटा स्टील बेयरिंग डिवीजन, टाटा स्टील मेटालिक्स, टाटा स्टील गम्हरिया,
टाटा स्टील के आयरन ओर और कालियरी माइंस के कर्मचारियों के बीच बांटा जायेगा. 315 करोड़ में से जमशेदपुर प्लांट ट्यूब डिवीजन समेत कंपनियों में 163.85 करोड रुपए की राशि बोनस के मद में बांटी जाएगी।

इसके तहत ओल्ड सीरीज के कर्मचारियों को अधिकतम 4,52,512 रूपये, न्यू सीरीज के कर्मचारियों को 1,28,448 रूपये अधिकतम और 39,016 रूपये न्यूनतम मिलेगा. औसत कर्मचारियों का बोनस 1,48,675 रूपये मिलेगा.
टाटा स्टील के बोनस की राशि कर्मचारियों के बैंक एकाउंट में 11 सितम्बर को चला जायेगा. टाटा स्टील के कर्मचारियों के वेज रिवीजन समझौता का लाभ इस साल से नहीं मिलेगा. चूंकि एरियर की राशि इस साल मिलेगी। इस कारण उस पर मिलने वाले बोनस की राशि अगले साल मिलेगी. यानि इस साल तों बेहतर बोनस मिला है और अगले साल भी बेहतर बोनस मिलेगा.
पुराने फार्मूला पर ही तय हुई राशि
पूर्व के समझौते के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पहले से लागू वार्षिक बोनस फार्मूला को ही जारी रखा गया है। बोनस राशि कंपनी के प्रदर्शन से जुड़े विभिन्न मानकों के आधार पर तय की गई है। इसमें भारत में टाटा स्टील के परिचालनों का शुद्ध लाभ, बिक्री योग्य स्टील की प्रति टन लाभप्रदता, उत्पादकता और सुरक्षा प्रदर्शन को प्रमुख आधार बनाया गया है।
11,035.24 करोड़ रहा समायोजित शुद्ध लाभ
कंपनी के प्रदर्शन संबंधी आंकड़ों के मुताबिक, असाधारण मदों को समायोजित करने के बाद वित्तीय वर्ष 2025-26 में टाटा स्टील का शुद्ध लाभ 11,035.24 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान बिक्री योग्य स्टील का उत्पादन 1.611 करोड़ टन रहा, जबकि प्रति टन बिक्री योग्य स्टील पर लाभ 6,852 रुपये दर्ज किया गया।

क्रूड स्टील उत्पादन 1.726 करोड़ टन
कंपनी का कुल क्रूड स्टील उत्पादन 1.726 करोड़ टन रहा। उत्पादकता 674.2 टन प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष दर्ज की गई।
सुरक्षा प्रदर्शन के तहत मिले पांच करोड़
सुरक्षा प्रदर्शन में कर्मचारियों का लॉस्ट टाइम इंज्यूरी फ्रिक्वेंसी रेट (LTIFR) 0.39 रहा। यदि पैरामीटर 0.40 को छू जाता तो कर्मचारी पांच करोड़ रुपए से वंचित हो जाते। यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी के अनुसार 0.01 से बच गए। उनके अनुसार कर्मचारियों को सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है।
बोनस समझौते से कर्मचारियों में खुशी
वार्षिक बोनस समझौता होने के बाद टाटा स्टील कर्मचारियों में उत्साह है। समझौता होने की जानकारी के बाद समर्थक विशाल माला लेकर पहुंचे और टॉप 4 को सम्मानित किया
बाजार में आएगी तेजी
जमशेदपुर के 11 हजार से अधिक कर्मचारियों के बीच 163.85 करोड़ रुपये का वितरण होगा। इसका व्यापक प्रभाव शहर वस्तु एवं वित्तीय मार्केट पर पड़ेगा।
इस साल 11.18 करोड रुपए ज्यादा मिले
इस साल कर्मचारियों को बोनस मद में 11.18 करोड रुपए ज्यादा मिले हैं। पिछले साल अर्थात वित्तीय वर्ष 2024-2025 में 303.12 करोड़ रुपए मिले थे
जबकि वित्तीय वर्ष 2025-2026 में यह राशि प्रबंधन ने बढ़ाकर 315 करोड़ रुपए कर दिए।
कभी फार्मूला तय करने पर यूनियन के टॉप 4 मजदूरों के निशाने पर आ गए थे और उनके पुतले तक जलाए गए थे। और आज आलम यह है कि इस टाइप फार्मूला के अनुसार कर्मचारियों के खाते में बंपर राशि जा रही है और लगातार इसमें इजाफा हो रहा है.
यहां यह भी उल्लेख नहीं है कि 2012 में प्रतिशत के आधार पर बोनस का समझौता करने से इनकार करते हुए प्रबंधन ने यूनियन के अनुसार नए फार्मूले पर बोनस राशि तय की थी.

