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    Home » पृथ्वी: हमारी शक्ति हमारा ग्रह और पर्यावरण संरक्षण | राष्ट्र संवाद
    मेहमान का पन्ना शिक्षा

    पृथ्वी: हमारी शक्ति हमारा ग्रह और पर्यावरण संरक्षण | राष्ट्र संवाद

    Devanand SinghBy Devanand SinghApril 22, 2026No Comments3 Mins Read
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    हमारी शक्ति हमारा ग्रह
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    पृथ्वी : हमारी शक्ति, हमारा ग्रह
    ————————-

    “थोड़ा सा वक्त चुराकर बतियाया है कभी
    कभी शिकायत न करने वाली
    गुमसुम बूढी पृथ्वी से उसका दुःख?
    अगर नहीं, तो क्षमा करना
    मुझे तुम्हारे आदमी होने पर संदेह है।—निर्मला पुतुल

     

    यह हमारी पृथ्वी जिसे हम मां संबोधित करते हैं यह केवल एक ग्रह नहीं बल्कि अनंत जीवन कथाओं की आधार है। जहाँ झूमती हरियाली, बलखाती नदियाँ, चहकते पंछियों के साथ गीत गाती शीतल हवाएं भी है। ऐसा प्रतीत होता है कि सब एक गीत गाते हैं जीवन का गीत। लेकिन आज के समय में यही गीत करुण पुकार में बदलता जा रहा है। जो पृथ्वी , माँ की तरह निःस्वार्थ भाव से अन्न, जल, वायु और आश्रय देती है। उसे हम क्या दे रहे हैं?उपर्लिखित पंक्तियां सहज ही दर्शाती है,पृथ्वी हर व्यक्ति की आवश्यकता को पूरा कर सकती है, लेकिन व्यक्ति के लालच को नहीं ।इसी बढ़ते लालच से जंगलों की कटाई, जल संकट इत्यादि से पृथ्वी पर संकट गहराया है। आंकड़ों की माने तो प्रत्येक वर्ष लगभग एक करोड़ हेक्टेयर वन नष्ट हो रहे हैं। प्रत्येक वर्ष लगभग 80 लाख टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में पहुंच रहा है जो जलीय जीव जंतुओं को प्रभावित कर रहा है। (विश्व स्वास्थ्य संगठनके अनुसार) लगभग 70 लाख लोगों की मृत्यु वायु प्रदूषण से होती है। भारत वर्ष में भी कई शहरों का AGI स्तर इन दिनों खतरनाक सीमा तक पहुंच चुका है, जो निरंतर स्वास्थ्य के लिये गंभीर खतरा बढ़ा रहा है। गंभीरता से मनन एवं चिंतन करने का यह विषय है कि अब नहीं तो कब?
    यह प्रश्न ध्यान में रहना चाहिये कि पृथ्वी हमारे पूर्वजों की अमानत नहीं बल्कि अपने बच्चों का कर्ज है तो इसकी समुचित देखभाल कर सुरक्षित अपनी भावी पीढ़ी को दें। जो आंकड़े निरंतर अध्ययन से आ रहें हैं वह डराने वाले हैं। ” जब आखिरी पेड़ कट जायेगा, आखिरी नदी सूख जायेगी या हिमखंडों के पिघलने से जलमग्न की स्थिति उत्पन्न होगी तो समझ में आयेगा कि न तो बैंकों में रखा पैसा जान बचायेगा न वृक्षों को काट कर खड़ी की गई अट्टालिकाएं।

    विचार किया जा जाये तो इस समस्या का कारण केवल उद्योग या सरकार, नहीं , हमारी सोच है। अक्सर हम यही सोचते हैं कि मेरे अकेले के बदलने से क्या होगा? लेकिन सच्चाई यही है कि हर बड़ा प्रयास हमारे छोटे -छोटे प्रयासों से ही संभव है।

    इस वर्ष विश्व पृथ्वी दिवस की आधिकारिक थीम “हमारी शक्ति ,हमारा ग्रह है।” यह विशेष रूप से नवीकरणीय उर्जा, स्वच्छ उर्जा को बढ़ावा देने और जलवायु संकट से निपटने हेतु जनशक्ति पर केन्द्रित है।

    इसका लक्ष्य आगामी चार वर्षों में स्वच्छ बिजली को तीन गुना करना है ।प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना है जो बिना सामूहिक प्रयास, बिना जन चेतना के असंभव है।

    संक्षिप्ततः 1970 से अमेरिकी सीनेट की पहल पर जिस उद्देश्य से पृथ्वी दिवस की शुरुआत की गई ,जिस पर्यावरण संरक्षण के लिये लोगों को एकजुट किया गया,वह आज और ज्यादा आवश्यक लग रहा है। पेड़ लगा कर उनकी देखभाल करके, प्लास्टिक के उपयोग को कम करके, पानी और बिजली बचाकर, कचरे का सही निष्पादन एवं अधिक से अधिक वस्तुओं की रिसाइक्लिंग करके अपना योगदान तो दे ही सकते हैं।यह बहुत छोटी छोटी आदतें हैं पर हम सबका यह गिलहरी प्रयास सामूहिकता में अपनी पृथ्वी को बचाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास हो सकता है।

    :–
    डॉ अनिता शर्मा
    प्रान्त प्रमुख,पर्यावरण आयाम
    अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, झारखंड

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