आदिवासी हो समाज महासभा के अधिवेशन में परंपराओं की शुद्धता पर मंथन
राष्ट्र संवाद संवाददाता
चाईबासा आदिवासी हो समाज महासभा का दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन 2026 रविवार को आदिवासी कल्याण केंद्र किरीबुरु में पारंपरिक बोंगा बुरु पूजा, झंडोत्तोलन और सामूहिक गोवारी प्रार्थना के साथ शुरू हुआ। अधिवेशन में प्रतिनिधि सभा ने भाग कर शादी (केया-केपेया आंदी) की सामाजिक प्रक्रिया पर गहन चर्चा करते हुए बाला में विवाह की प्रथा को अमान्य करार दिया और पारंपरिक रीति से ही विवाह संपन्न करने पर सहमति बनी। साथ ही मारंग बोंगा (गोत्रीय इतिहास) को पुनर्जीवित करने, अंतर्जातीय विवाह व रिंग सेरेमनी को सामाजिक मान्यता न देने जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। महासभा ने समाज से आह्वान किया कि वे अपनी परंपराओं की शुद्धता बनाए रखें, ताकि हो समाज की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सके।

