लेखक: राष्ट्र संवाद संवादाता
देश भर में नीट पेपर लीक के विरोध में जहानाबाद में छात्रों का उग्र प्रदर्शन जैसी घटनाएं चिकित्सा शिक्षा की प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) भारत की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसमें हर साल लाखों अभ्यर्थी अपने भविष्य के सपने संजोकर बैठते हैं। प्रश्न पत्र लीक होने की खबरों ने न केवल छात्रों के मनोबल को तोड़ा है, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। बिहार का जहानाबाद जिला इस आक्रोश का नवीनतम केंद्र बना, जहां स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस को सख्त कदम उठाने पड़े।
नीट पेपर लीक के विरोध में जहानाबाद में छात्रों का उग्र प्रदर्शन
जहानाबाद नीट परीक्षा में पेपर लीक के विरोध में पूरे देश में छात्रों का आंदोलन जारी है। इसी कड़ी में बिहार के जहानाबाद में भी छात्रों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र सड़कों और पटना गया रेलवे ट्रैक पर उतर आए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया। जिलाधिकारी आवास के बाहर भी जमकर रोड़ेबाजी की गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया। जहानाबाद के पुलिस अधीक्षक कोटा किरण कुमार ने स्वयं मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और पुलिस बल का नेतृत्व करते हुए उग्र प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आवश्यक बल प्रयोग किया। स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस की ओर से लगभग 100 राउंड फायरिंग कि गई है।
घटना के बाद पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।
इस घटना ने NEET परीक्षा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश भर में छात्र संगठन पेपर लीक की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। [INTERNAL_LINK_HOLDER]
विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद में भी चर्चा होने की संभावना है।
पेपर लीक की घटनाएं नई नहीं हैं, लेकिन नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में इस तरह की गड़बड़ी से लाखों छात्रों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि परी तकनीकी सुधारों के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
प्रशासनिक कार्रवाई और भविष्य की राह
जहानाबाद की घटना के बाद बिहार सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। इस बीच, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने भी बयान जारी कर कहा है कि पेपर लीक की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। अभ्यर्थियों को आश्वस्त किया गया है कि परीक्षा की शुचिता बनी रहेगी।
विशेषज्ञों का मत है कि केवल जांच समिति गठित करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में मूलभूत परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जैमर युक्त परीक्षा केंद्र, और प्रश्न पत्रों के परिवहन में जीपीएस ट्रैकिंग जैसे तकनीकी उपायों को अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही, दोषी अधिकारियों और माफियाओं पर त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए ताकि भविष्य में नीट पेपर लीक के विरोध में जहानाबाद में छात्रों का उग्र प्रदर्शन जैसी नौबत दोबारा न आए। छात्रों का विश्वास बहाल करना वर्तमान सरकार और एनटीए की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

