लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा।यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) में सीएसआर के तहत कराए गए विकास कार्यों के भुगतान में कथित देरी से जादूगोड़ा, नरवा, भाटिन और आसपास के करीब 15 स्थानीय संवेदक आर्थिक संकट में हैं। संवेदकों का दावा है कि उनके बिल पिछले चार से पांच महीने से लंबित हैं, जबकि सड़क मरम्मत, स्कूलों की रंगाई-पुताई, पेयजल योजना और सामुदायिक भवन समेत निर्धारित कार्य पूरे कर एमबी बुक, बिल व अन्य दस्तावेज जमा किए जा चुके हैं।
सीएसआर के तहत कराए गए विकास कार्यों के भुगतान में देरी
कर्ज लेकर काम, अब ईएमआई का दबाव
स्थानीय संवेदकों के अनुसार अधिकांश काम उन्होंने बैंक ऋण और बाजार से उधारी लेकर पूरे किए। भुगतान नहीं होने से बैंक की ईएमआई, ब्याज और कर्मचारियों-मजदूरों के भुगतान का दबाव बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि पहले भुगतान 30-45 दिनों में हो जाता था, लेकिन अब फाइलें लंबे समय तक लंबित रहने से परेशानी बढ़ गई है।
विश्वकर्मा पूजा पर भी संकट
17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा को देखते हुए संवेदकों की चिंता और बढ़ गई है। इस अवसर पर मजदूरों, वेल्डरों, फिटरों और ड्राइवरों को उपहार, बोनस व भोज देने की परंपरा है। संवेदकों का कहना है कि भुगतान अटका रहने से इस खर्च को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
एकाउंट्स प्रक्रिया पर उठे सवाल
कुछ संवेदकों ने यूसीआईएल के एकाउंट्स विभाग पहुंचकर भुगतान में देरी पर नाराजगी जताई। एक अधिकारी की कार्यशैली को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि व्यक्तिगत आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संवेदकों ने उच्च प्रबंधन से हस्तक्षेप कर लंबित भुगतान जल्द कराने की मांग की है।
निदेशक वित्त ने कहा—मामले का रिव्यू करेंगे
यूसीआईएल के निदेशक वित्त विक्रम केसरी दास ने राष्ट्र संवाद से कहा, “कंपनी में सभी कार्य नियमों के अनुसार किए जा रहे हैं। किसी भी संवेदक का बिल जानबूझकर नहीं रोका जा रहा है। फिर भी मामला क्या है, इसे एक बार रिव्यू करता हूं।”
लंबित भुगतान के बीच अब संवेदकों की निगाह यूसीआईएल प्रबंधन की कार्रवाई पर टिकी है। अधिक जानकारी के लिए यूसीआईएल आधिकारिक वेबसाइट देखें।

