Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » किसी रहस्य से कम नहीं है 6600 मीटर ऊंचा कैलाश पर्वत
    Headlines धर्म

    किसी रहस्य से कम नहीं है 6600 मीटर ऊंचा कैलाश पर्वत

    News DeskBy News DeskNovember 12, 2021No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    नई दिल्ली. 6600 मीटर ऊंचा कैलाश पर्वत पश्चिमी देशों के लोगों के लिए किसी रहस्य से कम नहीं है. पूर्व की संस्कृति में माउंट कैलाश काफी विख्यात है. कैलाश पर्वत पर कई ऐसे रहस्य हैं जिनके विषय में श्रद्धालुओं का जानना आवश्यक है.

    कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है और यह सिंधु, ब्रह्मपुत्र, गंगा की सहायक नदियों के पास है. ऐसा माना जाता है की कैलाश पर्वत हिमालय का केंद्र है.

    वैज्ञानिकों के अनुसार यह धरती का केंद्र है. कैलाश पर्वत दुनिया के 4 धर्मों- हिन्दू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म का केंद्र भी है.

    कैलाश पर्वत एक विशालकाय पिरामिड है, जो 100 छोटे पिरामिडों का केंद्र है. कैलाश पर्वत की संरचना कम्पास के 4 बिंदुओं के समान है और एकांत स्थान पर स्थित है, जहां कोई भी बड़ा पर्वत नहीं है.

    ऐसा कहा जाता है की कैलाश पर्वत पर चढ़ना मना है, लेकिन 11वीं सदी में एक तिब्बती बौद्ध मिलारेपा ने इस पर चढ़ाई की थी. रूस के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट ‘यूएनस्पेशियल’ मैग्जीन के 2004 के जनवरी अंक में प्रकाशित हुई थी. हालांकि मिलारेपा ने इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा इसलिए यह भी एक रहस्य है.
    कैलाश पर्वत की चार दिशाओं से चार नदियां निकलती हैं: ब्रह्मपुत्र, सतलज, सिंधु और करनाली. इन नदियों से ही गंगा, सरस्वती सहित चीन की अन्य नदियां भी निकलती हैं. कैलाश की चारों दिशाओं में विभिन्न जानवरों के मुंह हैं जिसमें से नदियों का उद्गम होता है. पूर्व में अश्वमुख है, पश्चिम में हाथी का, उत्तर में सिंह का, दक्षिण में मोर का मुंह है.

    हिमालय वासियों का कहना है कि हिमालय पर यति मानव रहता है. कोई इसे भूरा भालू कहता है, कोई जंगली मानव तो कोई हिम मानव. यह धारणा प्रचलित है कि यह लोगों को मारकर खा जाता है. कुछ वैज्ञानिक इसे निंडरथल मानव मानते हैं. विश्वभर में करीब 30 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हिमालय के बर्फीले इलाकों में हिम मानव मौजूद हैं.

    अगर आप कैलाश पर्वत की ओर जाएंगे तो लगातार एक आवाज सुनाई देती है. ध्यान से सुनने पर यह आवाज ‘डमरू’ या ‘ॐ’ की आवाज जैसी होती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि हो यह आवाज बर्फ के पिघलने की हो सकती है. यह भी हो सकता है कि प्रकाश और ध्वनि के बीच इस तरह का समागम होता है कि यहां से ‘ॐ’ की आवाजें सुनाई देती हैं.

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleगूगल क्रोम को लेकर खुलासा, क्रोम ब्राउज़र आपके पर्सनल डेटा पर रखता है नजर
    Next Article पहाड़ों पर बर्फबारी से मैदानी इलाकों में बढ़ी ठंड , तमिलनाडु में हो रही बारिश, बाढ़ जैसे हालात

    Related Posts

    महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर भाजपा का रांची में महिला आक्रोश मार्च, जिलाध्यक्ष संजीव सिन्हा के नेतृत्व में जमशेदपुर महानगर के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भरी हुंकार

    April 25, 2026

    मिथिला सांस्कृतिक परिषद जमशेदपुर द्वारा जानकी नवमी समारोह का आयोजन 

    April 25, 2026

    गंगा नारायण सिंह जयंती पर मैदान में उमड़ा जनसैलाब, 55 हजार लोगों की ऐतिहासिक भागीदारी पारंपरिक वेशभूषा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बुद्धिजीवियों के संबोधन से गूंजा गोपाल मैदान

    April 25, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    रानीश्वर के कामती बालू घाट पर अवैध उठाव का खेल, दिनदहाड़े सक्रिय दिखे बालू माफिया

    उपायुक्त की अध्यक्षता में स्पॉन्सरशिप एवं फोस्टर केयर समिति की बैठक आयोजित

    गर्मी और हीट वेव से बचाव को लेकर जिला प्रशासन की अपील

    जनगणना 2027 की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक, अधिकारियों को दिए निर्देश

    पेयजल समस्याओं के समाधान के लिए जिला व प्रखंड स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित

    झारखंड विधानसभा का शैक्षणिक भ्रमण, प्रशिक्षु अधिकारियों को दी गई प्रशासनिक सीख

    गुर्रा नदी की जर्जर पुलिया बनी जानलेवा खतरा, 10 गांवों का संपर्क संकट में, मरम्मत नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

    मजदूर आंदोलन के आगे झुकी ठेका कंपनी, यूसील भाटीन माइंस में 4 दिन की हड़ताल के बाद मांगों पर बनी सहमति, ओवरटाइम दोगुना व कैंटीन शुरू करने का फैसला

    अग्रसेन भवन समिति चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न, दीपक व अमित बने सचिव-उपसचिव, नई कमेटी ने आधुनिकरण का रखा लक्ष्य

    झारखंड क्षत्रिय संघ ने दी स्वतंत्रता सेनानी वीर कुंवर सिंह को श्रद्धांजलि

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.