Browsing: संपादकीय

न्याय का विस्तार ही लोकतंत्र की असली कसौटी देवानंद सिंह भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत का यह कथन कि…

स्वास्थ्य व्यवस्था में ‘सेवा’ नहीं, ‘सौदेबाजी’: गंभीर चेतावनी ईमानदार नेतृत्व बनाम असहयोगी तंत्र: सुधार की राह में सबसे बड़ी बाधा…

शांति वार्ता के बीच सैन्य सियासत पाकिस्तान की दोहरी रणनीति पर सवाल देवानंद सिंह मध्य-पूर्व की जटिल भू-राजनीति एक बार…

सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर सवाल: क्या ‘बंटवारे’ की राजनीति पर लगेगा विराम? देवानंद सिंह झारखंड में सूचना आयुक्तों की…

आक्रामक बयानबाजी या राजनीतिक हताशा? कांग्रेस की नई रणनीति पर सवाल देवानंद सिंह भारतीय राजनीति में बयानबाजी कोई नई बात…

क्या ‘सीबीआई का अधिकार क्षेत्र’ राजनीतिक खींचतान का शिकार हो गया है? राज्यों द्वारा सहमति वापसी और केंद्र-राज्य टकराव पर…