लेखक: इंद्र यादव
आईजीआरएस रिपोर्ट पर उठे सवालों के बीच भदोही में लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली संदेह के घेरे में है।
इंद्र यादव/उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में भ्रष्टाचार का एक अजीब मामला सामने आया है। यहाँ लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी जनता की समस्याओं को सुलझाने के बजाय कागजों पर ही खेल कर रहे हैं। बिना जमीन पर उतरे, ऑफिस की चार दीवारों के अंदर बैठकर ही टूटी सड़कों को ‘नया और दुरुस्त’ बता दिया गया है।
इस घपले के खिलाफ सुरियावां क्षेत्र के ग्राम सनाथपट्टी के युवा समाजसेवी दिनेश यादव ‘दादा’ खुलकर सामने आए हैं और उन्होंने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आईजीआरएस रिपोर्ट की जांच में खुलासा
क्षेत्र की जनता लंबे समय से बदहाल सड़कों से परेशान थी। इसी परेशानी को दूर करने के लिए दिनेश यादव ने शासन के आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर दो प्रमुख सड़कों की खराब हालत की शिकायत दर्ज कराई थी!
- पाली-सुरियावां मार्ग
- सनाथपट्टी-महदेपुर मार्ग
इन दोनों ही रास्तों पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जिससे रोज छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों का चलना तक दूभर हो गया है।
विभाग का फर्जी जवाब
जब इस मामले में PWD के ज्ञानपुर स्थित अधिशासी अभियंता की तरफ से जवाब आया, तो सच्चाई सामने आने पर हर कोई हैरान रह गया।
विभाग की तरफ से जो रिपोर्ट भेजी गई, उसमें दावा किया गया कि—‘अधिकारियों द्वारा मौके का स्थलीय निरीक्षण कर लिया गया है और सड़क का निर्माण कार्य पूरी तरह से पूर्ण पाया गया है’।
समाजसेवी का आरोप: मौके पर नहीं आया कोई अधिकारी
जब समाजसेवी दिनेश यादव ने इस रिपोर्ट की हकीकत जांची, तो पता चला कि यह पूरी तरह से झूठी है। दिनेश यादव का आरोप है कि—मौके पर आज तक कोई भी इंजीनियर या जिम्मेदार अधिकारी जांच करने आया ही नहीं।
अधिकारियों ने सिर्फ फोन पर बात करके औपचारिकता पूरी कर दी। जमीन पर सड़कों की हालत वैसी ही बदहाल है, जैसी शिकायत से पहले थी। एक इंच भी नया काम नहीं हुआ है।
जांच और कार्रवाई की मांग
दिनेश यादव ने कड़े शब्दों में अधिकारियों की इस हरकत की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि ये अधिकारी अपनी नाकामी छिपाने के लिए शासन को गुमराह कर रहे हैं। कागजों पर झूठी रिपोर्ट लगाकर वे सरकार को यह दिखाना चाहते हैं कि उन्होंने विकास के सारे काम पूरे कर दिए हैं, जबकि असलियत में जनता धूल और गड्ढों के बीच जीने को मजबूर है।
समाजसेवी दिनेश यादव ने भदोही के जिलाधिकारी से इस पूरे मामले की गहराई से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अल्टीमेटम दिया है कि— जनता के हक के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषी अधिकारियों की जल्द से जल्द पहचान की जाए।
उन पर कठोर से कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई हो। यदि प्रशासन ने इस फर्जीवाड़े पर जल्द एक्शन नहीं लिया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे बल्कि आम जनता को साथ लेकर सड़कों पर उतरकर विशाल आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
इस मामले ने भदोही जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता को उम्मीद है कि जिलाधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।

