Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » गुरु पूर्णिमा: जीवन को दिशा देने वाले प्रकाश का अभिनंदन
    धर्म मेहमान का पन्ना राष्ट्रीय संपादकीय

    गुरु पूर्णिमा: जीवन को दिशा देने वाले प्रकाश का अभिनंदन

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 28, 2026No Comments3 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    गुरु पूर्णिमा
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    लेखक: महेन्द्र तिवारी

    आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला गुरु पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति की सबसे प्राचीन और गौरवशाली परंपराओं में से एक है। यह केवल धार्मिक आस्था का उत्सव नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और कृतज्ञता का ऐसा पर्व है जो मनुष्य को उसके जीवन के वास्तविक मार्गदर्शकों के प्रति सम्मान प्रकट करने की प्रेरणा देता है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन देश भर में लोग अपने गुरु, शिक्षक, माता पिता तथा जीवन में दिशा देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

    भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान अत्यंत ऊंचा माना गया है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह जीवन के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाला पथप्रदर्शक होता है। संस्कृत में कहा गया है कि “गु” का अर्थ अंधकार और “रु” का अर्थ उसका नाश करने वाला है। इस प्रकार गुरु वह है जो अज्ञान रूपी अंधकार को समाप्त कर विवेक और सत्य का प्रकाश फैलाता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर के समान सम्मान दिया गया है।

    गुरु पूर्णिमा: व्यास पूर्णिमा के रूप में

    गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है क्योंकि यह महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाई जाती है। वेदव्यास ने वेदों का संकलन किया, महाभारत की रचना की तथा अनेक पुराणों का संपादन किया। भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यवस्थित स्वरूप देने में उनका योगदान अतुलनीय माना जाता है। इसलिए इस दिन उनका स्मरण कर ज्ञान की परंपरा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।

    इस पर्व का महत्व केवल सनातन परंपरा तक सीमित नहीं है। योग परंपरा में मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने सप्तर्षियों को योग का ज्ञान देकर आदि गुरु के रूप में मानवता के लिए ज्ञान का द्वार खोला। बौद्ध परंपरा में भी इस दिन विशेष महत्व है क्योंकि माना जाता है कि ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपना प्रथम उपदेश इसी दिन दिया था। इस प्रकार गुरु पूर्णिमा विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं को जोड़ने वाला सांस्कृतिक सेतु भी है।

    आज के समय में गुरु की परिभाषा और भी व्यापक हो गई है। विद्यालय का शिक्षक, माता पिता, कोई अनुभवी व्यक्ति, कोई प्रेरक व्यक्तित्व अथवा जीवन में सही दिशा दिखाने वाला प्रत्येक व्यक्ति गुरु कहलाने योग्य है। आधुनिक समाज में तकनीक ने ज्ञान प्राप्ति के अनेक साधन उपलब्ध करा दिए हैं, लेकिन विवेक, संस्कार और चरित्र निर्माण आज भी गुरु के मार्गदर्शन से ही संभव होता है। इंटरनेट सूचना दे सकता है, परंतु सही और गलत का विवेक सिखाने का कार्य गुरु ही करता है।

    गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश केवल पूजा और अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। यह आत्ममंथन का अवसर भी है। इस दिन व्यक्ति अपने जीवन की उपलब्धियों के पीछे खड़े उन सभी लोगों को याद करता है जिन्होंने कठिन समय में उसका मार्गदर्शन किया। उनके प्रति आभार व्यक्त करना, उनके आदर्शों का अनुसरण करना और प्राप्त ज्ञान का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करना ही इस पर्व का सार है।

    आज जब जीवन की गति अत्यंत तेज हो गई है और भौतिक उपलब्धियों की दौड़ बढ़ती जा रही है, तब गुरु पूर्णिमा हमें विनम्रता, अनुशासन और निरंतर सीखने की प्रेरणा देती है। यह पर्व बताता है कि ज्ञान तभी सार्थक होता है जब उसके साथ संस्कार और सदाचार भी जुड़े हों। गुरु का सम्मान केवल एक दिन का अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवनभर अपनाई जाने वाली संस्कृति है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने गुरु के उपदेशों को जीवन में उतारने का प्रयास करे, तो परिवार, समाज और राष्ट्र सभी अधिक जागरूक, संवेदनशील और नैतिक बन सकते हैं। यही गुरु पूर्णिमा का शाश्वत संदेश है।

    आषाढ़ पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा गुरु महत्व भारतीय संस्कृति व्यास पूर्णिमा
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleआईजीआरएस रिपोर्ट पर उठे सवाल: भदोही PWD पर भ्रष्टाचार और फर्जी रिपोर्ट के गंभीर आरोप
    Next Article नालासोपारा में एमडी ड्रग्स बरामद: 1.02 करोड़ का मेफेड्रोन जब्त, नाइजीरियाई तस्कर फरार

    Related Posts

    आइसा का बड़ा आरोप: शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ देशभर में दमनात्मक कार्रवाई जारी

    July 28, 2026

    आइसा का आरोप: देशभर में कार्रवाई की जा रही है प्रदर्शनकारी छात्रों पर

    July 28, 2026

    बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत: असम में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कर रही काम, 68 मौतें

    July 28, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    क्रेशर मशीन के विरोध में ग्रामीणों का डीसी कार्यालय पर प्रदर्शन, सुरक्षा व्यवस्था रही कड़ी

    गुरु रविदास की 650वीं जयंती वर्ष पर भाजपा का ‘समरसता संकल्प अभियान

    टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में आज मनाया जाएगा अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस, वन महोत्सव का होगा समापन

    झारखंड भाजपा प्रदेश कार्यसमिति घोषित: बाबूलाल, अर्जुन मुंडा, चंपाई समेत दिग्गजों को मिली अहम जिम्मेदारी

    कवि और कलम के ओपन माइक में गूंजी कविता और शायरी, नई प्रतिभाओं को मिला मंच

    आइसा का बड़ा आरोप: शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ देशभर में दमनात्मक कार्रवाई जारी

    आइसा का आरोप: देशभर में कार्रवाई की जा रही है प्रदर्शनकारी छात्रों पर

    जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के समर्थन में जमशेदपुर में धरना, परीक्षा धांधली और दमन के खिलाफ बुलंद हुई आवाज

    बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत: असम में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कर रही काम, 68 मौतें

    ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने प्रदर्शनकारियों की धरपकड़ का आरोप लगाया, हिरासत में लिए गए युवाओं की रिहाई की मांग

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.