Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » बिना संघर्ष के सत्ता: क्या बिना मेहनत के बन सकते हैं राजा? | राष्ट्र संवाद
    मेहमान का पन्ना राजनीति

    बिना संघर्ष के सत्ता: क्या बिना मेहनत के बन सकते हैं राजा? | राष्ट्र संवाद

    Devanand SinghBy Devanand SinghApril 13, 2026No Comments3 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    क्या बिना हाथ-पैर हिलाए ‘राजा’ बना जा सकता है! एक खतरनाक भ्रम का खुलासा

    मुंबई (इंद्र यादव) बिना पसीना बहाए सत्ता का ज्ञान पाने की कोशिश केवल एक धोखा है। राजनीति कोई ‘वीडियो गेम’ नहीं, बल्कि हाड़-मांस के इंसानों की सेवा का नाम है।
    आज के दौर में एक बड़ा ही अजीब और खतरनाक चलन शुरू हुआ है। कुछ लोगों को लगता है कि राज-काज चलाने का मतलब सिर्फ आलीशान कुर्सियों पर बैठकर फाइलें पढ़ना या सोशल मीडिया पर भाषण देना है। यह एक ऐसा बौद्धिक षड्यंत्र है, जो नई पीढ़ी को मेहनत और जमीन से काट रहा है।झूठ का पर्दाफाश करता है जो कहता है कि बिना संघर्ष किए आप देश या राज्य चला सकते हैं।

    किताबी ज्ञान बनाम जमीनी हकीकत

    बाजार में ऐसी हजारों किताबें और ‘क्रैश कोर्स’ मौजूद हैं जो दावा करते हैं कि वे आपको मैनेजमेंट और लीडरशिप सिखा देंगे। लेकिन राजनीति शास्त्र की कोई भी किताब आपको वह नहीं सिखा सकती जो एक गरीब की झोपड़ी में बिताई गई एक रात सिखा सकती है।
    किताबें: नियम और कानून सिखाती हैं।
    श्रम (मेहनत): उन नियमों को लागू करने का साहस और संवेदना सिखाता है।
    बिना श्रम के हासिल किया गया ज्ञान केवल ‘अहंकार’ पैदा करता है। जब एक व्यक्ति बिना संघर्ष के ऊंचे पद पर बैठता है, तो उसे जनता की भूख, बेरोजगारी और दुख सिर्फ ‘आंकड़े’ नजर आते हैं, ‘इंसान’ नहीं।

    चाटुकारों का घेरा और षड्यंत्र

    यह एक सोची-समझी साजिश है कि ऐसे ‘लीडर्स’ तैयार किए जाएं जो जमीन से न जुड़े हों। क्यों? क्योंकि जो नेता जनता के बीच नहीं जाता, वह पूरी तरह अपने सलाहकारों और चाटुकारों पर निर्भर हो जाता है। ऐसे में सत्ता की चाबी नेता के पास नहीं, बल्कि पीछे बैठे उन लोगों के पास होती है जो अपनी उंगलियों पर उसे नचाते हैं।
    “श्रमहीन ज्ञान एक ऐसी तलवार है जिसमें धार नहीं होती। वह दिखने में तो सुंदर हो सकती है, लेकिन युद्ध नहीं जिता सकती।”

    राजा का धर्म: पसीने से लिखी जाती है तकदीर

    इतिहास उठाकर देख लीजिए, दुनिया के जितने भी महान शासक हुए—चाहे वो छत्रपति शिवाजी महाराज हों या सम्राट अशोक—उन सबने अपना बचपन और जवानी धूल और पसीने में बिताई थी। उन्होंने सीखा कि मिट्टी की महक क्या होती है और आम आदमी की जरूरत क्या है।
    आज के ‘डिजिटल राजा’ लैपटॉप के जरिए दुनिया बदलने की बात करते हैं। लेकिन याद रखिए, स्क्रीन पर दिखने वाली दुनिया और सड़क पर चलने वाली दुनिया में जमीन-आसमान का फर्क है। बिना श्रम के राज चलाने का ज्ञान हासिल करना वैसा ही है जैसे बिना पानी में उतरे तैरना सीखना।

    सावधान रहने की जरूरत क्यों है

    हमें ऐसे नेतृत्व से बचना होगा जो.
    जनता के बीच जाने से कतराता हो।
    सिर्फ एसी कमरों में बैठकर नीतियां बनाता हो।
    जिसने अपने जीवन में कभी किसी सामाजिक समस्या के लिए पसीना न बहाया हो।

    राज चलाने का असली ज्ञान लाइब्रेरी में नहीं, बल्कि लोक-संग्रह (लोगों के बीच रहने) से आता है। बिना श्रम के सत्ता का सपना देखना न केवल खुद को धोखा देना है, बल्कि पूरे समाज के साथ गद्दारी है। असली नेता वही है जिसके हाथों में मेहनत के छाले हों और माथे पर जनता की सेवा का पसीना।
    जागिए और पहचानिए! सत्ता कोई विरासत या डिग्री नहीं, बल्कि कठिन परिश्रम से अर्जित किया गया ‘अनुभव’ है।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleकिशोर आक्रामकता: युवाओं में बढ़ती हिंसा और समाधान | राष्ट्र संवाद
    Next Article आशा भोसले का निधन: राहुल गांधी ने दी श्रद्धांजलि | राष्ट्र संवाद

    Related Posts

    देहरादून में ‘सौहार्द’ और ‘सचित्र संविधान दर्शन’ प्रदर्शनी का आयोजन

    August 7, 2026

    ब्रह्माकुमारी संस्था के कार्यक्रम में युवाओं से नशामुक्त समाज बनाने का आह्वान

    August 7, 2026

    युवा शक्ति ही झारखंड के भविष्य की दिशा तय करेगी : सुदेश कुमार महतो

    August 7, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    AI तकनीक से श्रावणी मेला प्रबंधन हुआ हाईटेक, रियल टाइम मॉनिटरिंग से श्रद्धालुओं को राहत

    स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों का उपायुक्त ने लिया जायजा

    12वां राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया

    देहरादून में ‘सौहार्द’ और ‘सचित्र संविधान दर्शन’ प्रदर्शनी का आयोजन

    ब्रह्माकुमारी संस्था के कार्यक्रम में युवाओं से नशामुक्त समाज बनाने का आह्वान

    आफताब आलम हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता, दो शूटर समेत चार गिरफ्तार

    लगातार पांचवीं बार नवल टाटा हॉकी झारखंड सब-जूनियर एवं जूनियर स्टेट चैंपियनशिप की मेजबानी करेगा एनटीएचए

    रेंगकर जलमीनार से लाती है पानी, बैटरी व्हीलचेयर के सहारे सपनों को उड़ान देना चाहती है मालती सिंह

    युवा शक्ति ही झारखंड के भविष्य की दिशा तय करेगी : सुदेश कुमार महतो

    नशे के अड्डों पर पुलिस का शिकंजा, सीनी में कई जगह छापेमारी

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.