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    बाबा नाम केवलम्  अनन्य भाव का कीर्तन है , जड़ वस्तु के प्रति विशेष आकर्षण को कम करता है कीर्तन

    Aman KumarBy Aman KumarJuly 9, 2025Updated:July 9, 2025No Comments2 Mins Read
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    बाबा नाम केवलम्  अनन्य भाव का कीर्तन है , जड़ वस्तु के प्रति विशेष आकर्षण को कम करता है कीर्तन

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    जमशेदपुर : आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से एक प्रहर का “बाबा नाम केवलम्” अखंड कीर्तन, 200 नारायण को भोजन कराया गया एवं गदरा क्षेत्र में घूम घूम कर ऑटो से जरूरतमंदों के बीच भोजन का वितरण किया गया।

    लाल बिहारी आनंद ने कहा कि लोग ज्यादा से ज्यादा कीर्तन करे । अनन्य भाव से कीर्तन करें “बाबा नाम केवलम्” अनन्य भाव का कीर्तन है। कीर्तन करने से जड़ वस्तु से मन ऊपर उठ सकता है

    जड़ वस्तु के प्रति अत्याधिक आकर्षण के कारण अवसाद रोग (डिप्रेशन) का जन्म होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 34 करोड़ से अधिक अवसाद रोग के मरीज पूरी दुनिया में है। भारतीय जनसंख्या का लगभग 5% करीब 6 करोड़ लोग अवसाद रोग से ग्रस्त हैं। अवसाद रोग के कारण की चर्चा करते हुए पुरोधा प्रमुख जी ने कहा कि *मनुष्य के जीने का ढंग बदल गया, व्यक्ति आत्मसुख तत्व से ग्रस्त हो स्वार्थी हो गया। आर्थिक विषमता के कारण समाज बिखर गया है ।* स्वतंत्रता की आड़ में युवक-युवतियां चारित्रिक पतन की ओर उन्मुख हो रहे हैं और अंततः हताश, निराश हो अवसादग्रस्त हो रहे हैं।

    जड़ वस्तु के प्रति विशेष आकर्षण को कम करता है कीर्तन बाबा नाम केवलम्  अनन्य भाव का कीर्तन है
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