Author: News Desk

राहुल गांधी जब भी सार्वजनिक मंच से बोलते हैं, तो ऐसा आभास देते हैं मानो अगला प्रधानमंत्री बनना अब बस औपचारिकता भर रह गया हो। लेकिन सियासत भावनाओं से नहीं, आंकड़ों और नतीजों से चलती है। 2014, 2019 और 2024 तीन लोकसभा चुनाव बीत चुके हैं और तीनों में जनता ने राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार नहीं किया। इसके बावजूद वे उसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते दिखते हैं। राजनीति में रिटायरमेंट की कोई तय उम्र नहीं होती, लेकिन लोकतंत्र में जनता बार-बार किसी नेता को नकार दे, तो वह खुद एक बड़ा संकेत होता है। राहुल गांधी आज…

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निशिकांत ठाकुर दिल्ली के रामलीला मैदान में 14 दिसंबर को आयोजित कांग्रेस की महारैली को देखने के बाद ऐसा लगता है कि भाजपा का यह नारा बुरी तरह फेल हो गया कि वह ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ बना सकेगी। इस महारैली में कांग्रेस ने यह दम दिखा दिया कि भाजपा का नारा भविष्य में कभी साकार नहीं हो सकेगा। देश के जितने लोगों ने उस महारैली में भाग लिया था, उनमें सभी स्थानीय नहीं थे, बल्कि देश के कोने—कोने से आए पार्टी के सदस्य थे। देशभर के कार्यकर्ताओं ने जिस उत्साह और जोश से इस महारैली में हिस्सा लिया, वह अंग्रेजों से आजादी काल की…

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मनरेगा की आत्मा पर सीधा प्रहार है वीबी-जी राम जी’ बिल देवानंद सिंह नीति आयोग के दस्तावेज़ों और सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों की भाषा चाहे कितनी भी आधुनिक क्यों न हो, लेकिन भारत के ग्रामीण जीवन की वास्तविक धड़कन आज भी खेत, मज़दूरी और अनिश्चित रोज़गार से ही तय होती है। इसी ग्रामीण यथार्थ के बीच महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा ने पिछले दो दशकों में न केवल एक योजना के रूप में, बल्कि एक अधिकार आधारित सामाजिक सुरक्षा कवच के रूप में अपनी पहचान बनाई। यही कारण है कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री जोसेफ़ स्टिग्लिट्ज़ ने…

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भिवानी से इंकार, हमको चाहिए जिला हिसार : सिवानी की एक दशक पुरानी, न्यायसंगत पुकार (अगस्त 2016 से जन-जन तक: सिवानी की आवाज़ और जिला पुनर्गठन का प्रश्न, एक नारा, एक विचार और सिवानी के भविष्य का सवाल।) – डॉ. सत्यवान सौरभ लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासनिक सीमाएँ पत्थर की लकीर नहीं होतीं। वे जनता की सुविधा, सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं और क्षेत्रीय संतुलन के अनुरूप समय-समय पर पुनः परिभाषित की जाती हैं। जब कोई प्रशासनिक ढांचा लगातार जनता के लिए असुविधा का कारण बने, तब उसका पुनर्विचार न केवल आवश्यक, बल्कि शासन की संवेदनशीलता की कसौटी भी बन जाता है। सिवानी उपमंडल…

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राम वी. सुतार के हाथों में आकर पत्थर बोल उठते थे -ललित गर्ग- राम वी. सुतार का शतायु जीवन केवल वर्षों की गणना नहीं था, वह भारतीय मूर्ति-कला की सदियों लंबी साधना का सजीव विस्तार था। सौ वर्ष की उम्र में उनका जाना ऐसा है जैसे पत्थर बोलने वाली भाषा का कोई मौन हो जाना, जैसे हथौड़े और छैनी के बीच जन्म लेने वाली संवेदनाओं का विराम। वे उन विरले कलाकारों में थे जिनके हाथों में पत्थर, धातु और कांस्य केवल पदार्थ नहीं रहते थे, वे चेतना बन जाते थे। आकृतियां नहीं गढ़ी जाती थीं, जीवन प्रकट होता था। उनके…

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🙏🌅नमस्कार 🌅🙏 *आपका *राष्ट्र* *आपका *संवाद* *राष्ट्र संवाद पञिका* *राष्ट्र संवाद तीसरे दशक में* *बेमिसाल 25 साल* *राष्ट्र संवाद की मुहिम : सकारात्मक पत्रकारिता से ही बदलेगा समाज* 🪷जय गणेश 🪷 💐दिनांक 20दिन शनिवार 2025 www.rashtrasamvad.com www.rastrasamvad.com Devanandsingh.com rashtrasamwad. com *********************** Check out rashtrasamvad (@rashtrasamvad1): https://twitter.com/rashtrasamvad1?s=08 ************************* *NOW RASHTRASAMVAD AVAILABLE ON MOBILE APP* JHAHIN2000/1039 *राष्ट्रसंवाद दैनिक:-* JHAHIN01092 *राष्ट्र संवाद नजरिया : क्या प्रियंका गांधी की ‘सॉफ्ट पावर’ के आगे अब फीके पड़ रहे हैं राहुल के तेवर?* *जमशेदपुर के पास उभरता नया हिल-स्टेशन जैसा पर्यटन स्थल, सतनाला झील बनी सैर और पिकनिक की नई पहचान* *राम वी. सुतार के हाथों…

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19 दिसम्बर फांसी दिवस अशफाक उल्ला खां : स्वतंत्रता आंदोलन का ओजस्वी क्रांतिकारी • प्रमोद दीक्षित मलय कुछ आरज़ू नहीं है, है आरज़ू तो यह है। रख दे कोई जरा सी, ख़ाके वतन कफ़न में।। ये पंक्तियां हैं काकोरी में सरकारी खजाना लूट घटना के महानायक मां भारती के सच्चे साधक क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां की जो उन्होंने फांसी दिए जाने के कुछ समय पूर्व लिखी थीं। लौकिक जीवन यात्रा के अंतिम समय में भी वह भारत माता की पग धूलि माथे सजाना चाहते थे। उनके जीवन का पल-पल देश की सेवा साधना को ही समर्पित था। कोई वैयक्तिक इच्छा-आकांक्षा…

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नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार करना कई मायनों में अहम देवानंद सिंह गत मंगलवार, 16 दिसंबर को दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट का एक आदेश भारतीय राजनीति और क़ानूनी विमर्श के केंद्र में आ खड़ा हुआ। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा नेशनल हेराल्ड मामले में दायर की गई चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। तकनीकी रूप से यह एक प्रक्रिया संबंधी आदेश था, लेकिन क़ानून की व्याख्या से लेकर जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक, इसके निहितार्थ दूरगामी हैं। इस आदेश के तुरंत बाद राजनीति के दोनों…

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नीतीश कुमार के कृत्य से समाज, संस्कृति, सत्ता और मानसिकता पर उठते सवाल चिंताजनक देवानंद सिंह भारतीय राजनीति में कई बार कोई छोटा-सा दृश्य, कोई एक पल या कोई एक वाक्य ऐसा तूफान खड़ा कर देता है, जो केवल उस घटना तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज, संस्कृति, सत्ता और मानसिकता तक के सवाल खड़े कर देता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान एक मुस्लिम महिला के चेहरे से हिजाब हटाने की कोशिश और उस पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री एवं निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद की विवादित टिप्पणी इसी…

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