-डॉ. सत्यवान सौरभ ऑस्ट्रेलिया को लंबे समय तक एक ऐसे बहुसांस्कृतिक लोकतंत्र के रूप में देखा गया है, जहाँ विविध धार्मिक, नस्ली और सांस्कृतिक समुदायों ने अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का अनुभव किया। यहूदी समुदाय भी इस सामाजिक संरचना का एक सशक्त और सम्मानित हिस्सा रहा है। किंतु हाल के वर्षों में, विशेषकर 2023 के बाद, यहूदी संस्थानों, सभास्थलों और व्यक्तियों के विरुद्ध लक्षित हिंसा की घटनाओं में वृद्धि ने इस धारणा को गंभीर चुनौती दी है। आगज़नी, नफ़रत भरी ग्रैफिटी, धमकियाँ और हमलों की घटनाएँ केवल आपराधिक कृत्य नहीं हैं, बल्कि वे ऑस्ट्रेलियाई समाज में बढ़ते ध्रुवीकरण, असहिष्णुता और असुरक्षा…
Author: News Desk
देवानंद सिंह मनरेगा की जगह लाने के लिए प्रस्तावित ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G) बिल’ अब केवल एक नीति दस्तावेज नहीं रहा, बल्कि वह सत्ता और विपक्ष के बीच संवैधानिक मर्यादा बनाम राजनीतिक रणनीति की नई जंग का केंद्र बन गया है। संसद से पारित होने के बाद भी राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहे इस बिल पर संसद की स्थायी समिति की बैठक बुलाए जाने से विवाद गहराता दिख रहा है। ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद सप्तगिरी शंकर उलाका द्वारा 29…
22 दिसम्बर गणित दिवस पर • प्रमोद दीक्षित मलय लेख का आरम्भ आज से लगभग 125 साल पहले एक गांव के विद्यालय की कक्षा तीन की गणित की बेला के एक दृश्य से करता हूं। शिक्षक बच्चों से बातचीत करते हुए कहते हैं कि तीन केले यदि तीन लोगों में या एक हजार केलों को एक हजार लोगों में बराबर बांटा जाये तो प्रत्येक को एक-एक केला मिलेगा। अर्थात् किसी दी हुई संख्या में उसी संख्या से भाग देने पर भागफल एक आता है। तभी एक बच्चे ने सवाल किया कि क्या शून्य को शून्य से भाग देने पर भी…
उस घर में रहती है वो अकेले, गुमसुम, स्मृतियों के सहारे जो था कभी गुलजार बच्चों की किलकारियों से पति से इकरार इनकार के बीच पगती थी जहां मोहब्बत अब वो है और हैं उसकी यादें जब वह बन गई थी किसी की बहू किसी की भाभी किसी की चाची और किसी अपने की बड़ी बहन और बेस्ट फ्रेंड बच्चे आते हैं पति आता है नीड़ में फिर मच जाता है कलरव चंद दिनों का यह कलरव तब बियाबान शांति में हो जाता है तब्दील जब बच्चे निकल जाते हैं जब पति चला जाता है दिवाली, होली, दशहरे में गुलज़ार…
दो दिन पहले तक दुनिया को इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का उपदेश दिया जा रहा था। बड़े मंचों से भाषण हो रहे थे, मानवता और सभ्यता की दुहाई दी जा रही थी। लेकिन आज वही दुनिया बांग्लादेश में बहते हिंदुओं के खून पर खामोश है। वही ताकतें, जो खुद को मानवाधिकारों की सबसे बड़ी संरक्षक बताती हैं, आज ऐसी चुप्पी साधे बैठी हैं मानो कुछ हुआ ही न हो। बांग्लादेश में जो कुछ बीते दिनों हुआ, वह सिर्फ एक पड़ोसी देश की आंतरिक अशांति नहीं है, बल्कि यह उस सलेक्टिव सोच और वैचारिक पाखंड का आईना है, जिसे…
राष्ट्र संवाद ठाणे, मुंबई (इंद्र यादव): ठाणे के वर्तक नगर इलाके में पुलिस ने फोटोशूट और मॉडलिंग का झांसा देकर देह व्यापार कराए जाने वाले एक संगठित सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस चौंकाने वाले मामले में हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाला एक वकील रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जिसने कानून की आड़ में लड़कियों का शोषण किया। पुलिस के अनुसार, छोटे शहरों से आई युवतियों को मॉडलिंग और शूट का लालच देकर थ्री और फाइव स्टार होटलों में भेजा जाता था, जहां उन्हें मोटी रकम लेकर प्रभावशाली ग्राहकों को सप्लाई किया जाता था। इस…
राष्ट्र संवाद संवाददाता मोतिहारी : एशिया के सबसे बड़े ऐतिहासिक सोनपुर मेला में इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने कला का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पौराणिक गज–ग्राह युद्ध और भगवान विष्णु द्वारा ग्राह वध की कथा पर आधारित 50 अद्वितीय रेत मूर्तियों का निर्माण कर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बनाया, जिसे एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने आधिकारिक मान्यता दी है। यह रिकॉर्ड प्रमाणन संख्या ABWR2405045 के साथ दर्ज किया गया है। एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के इंटरनेशनल चेयरमैन अविनाश डी. सुकुंदे ने मधुरेंद्र को बधाई देते हुए इसे सोनपुर मेला के इतिहास में पहली ऐसी…
जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल का भव्य समापन, पत्रकारिता–साहित्य–कला पर हुई सारगर्भित चर्चा राष्ट्र संवाद संवाददाता जमशेदपुर:बिष्टुपुर स्थित रमाडा होटल में आयोजित दो दिवसीय जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल का रविवार को भव्य समापन हुआ। दीप प्रज्वलन और नृत्य प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई, जिसने पूरे माहौल को साहित्य और कला के रंग में रंग दिया। समापन दिवस पर “आज की पत्रकारिता” विषय पर आयोजित परिचर्चा में रांची से आए वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा सहित पत्रकारिता जगत के कई दिग्गजों ने अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, चुनौतियों और जिम्मेदारियों पर गंभीर विमर्श करते हुए युवा…
देवानंद सिंह संसद में चल रही तीखी बहस के बीच मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) को लेकर उठे सवाल केवल एक सरकारी योजना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह बहस भारत के लोकतांत्रिक, संवैधानिक और सामाजिक ढांचे के मूल विचारों को चुनौती देती है। मनरेगा को खत्म करने या उसके स्वरूप में बुनियादी बदलाव की अटकलों ने देश भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों को गहरी चिंता में डाल दिया है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह कानून कमजोर किया गया या इसे सीमित कर दिया गया, तो इसका अर्थ होगा ‘काम के अधिकार’ की…
-ललित गर्ग- बांग्लादेश में बीते कुछ समय से जो घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, वे किसी एक देश की आंतरिक समस्या भर नहीं रह गए हैं, बल्कि दक्षिण एशिया की समूची भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए एक गंभीर चेतावनी बनते जा रहे हैं। युवा छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद जिस तरह ढाका सहित कई शहरों में हिंसा भड़की, उसने यह उजागर कर दिया कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार न तो कानून का शासन स्थापित कर पा रही है और न ही समाज को उन्माद व कट्टरता से बचाने में सक्षम दिखाई देती है। सड़कों…
