लेखक: राष्ट्रसंवाद, संवाददाता चांडिल प्रखंड के आसनबनी गांव में सोमवार को आषाढ़ सप्तमी के अवसर पर पारंपरिक जाताल पूजा श्रद्धा एवं उत्साह के साथ संपन्न हुई। इस वर्ष भी ग्रामीणों ने अच्छी वर्षा, बेहतर फसल और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। यह पूजा आदिवासी समाज की गहरी आस्था और प्रकृति के प्रति उनके सम्मान को दर्शाती है, जो सदियों से चली आ रही एक महत्वपूर्ण परंपरा का हिस्सा है। जाताल पूजा मुख्य रूप से कृषि प्रधान समाजों में मानसून के आगमन और आगामी फसल की समृद्धि के लिए की जाती है। यह त्योहार स्थानीय समुदायों के लिए केवल एक…
Author: Nikunj Gupta
लेखक: डॉ. प्रियंका सौरभ हरियाणा के **हांसी क्षेत्र के चैनत गाँव** में **पानी की समस्या** को लेकर चल रहा आंदोलन एक महत्वपूर्ण सामाजिक और प्रशासनिक प्रश्न को सामने लाता है। किसी भी नागरिक समाज में पीने के पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए लोगों को सड़क पर उतरना पड़े, यह अपने आप में शासन व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। पानी केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। इसलिए चैनत के ग्रामीणों द्वारा अपनी समस्या को लेकर आवाज उठाना पूरी तरह न्यायसंगत और लोकतांत्रिक अधिकारों के अनुरूप है। किंतु इसी आंदोलन के दौरान कुछ ऐसी टिप्पणियाँ सामने…
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाताराष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) देश में मेडिकल शिक्षा का प्रवेश द्वार है, और इसकी अखंडता छात्रों के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल ही में बिहार के लखीसराय में हुई NEET UG पुनर्परीक्षा में एक बड़े NEET UG पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ है, जिसने पूरे देश में शिक्षा जगत को हिला दिया है। इस मामले में पुलिस ने 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे छात्र, डमी अभ्यर्थी और बायोमेट्रिक सत्यापन कर्मी शामिल हैं। यह घटना देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक की…
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाताआरा/भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी युवा समाजसेवी भरत भूषण तिवारी के कथित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर बिहार समेत देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन, पुतला दहन और न्याय की मांग को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भरत भूषण तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने मुठभेड़ का दावा करते हुए उनकी हत्या कर दी। हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले में अलग दावा किया गया है। यह घटना ऐसे समय…
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददातादरभंगा में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग और दर्शनशास्त्र विभाग, डॉ प्रभात दास फाउंडेशन के साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण शैक्षिक कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। यह एकल व्याख्यान भारतीय ज्ञान मीमांसा के विविध आयाम पर केंद्रित होगा, जो भारतीय दर्शन और ज्ञान के गहन अध्ययन को बढ़ावा देगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों को एक मंच प्रदान करना है, जहाँ वे भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श कर सकें।दरभंगा, 22 जून। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग, दर्शनशास्त्र विभाग एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त…
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददातापुलिस बल अक्सर अपनी कठोरता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सख्त रवैये के लिए जाना जाता है। आम जनमानस में पुलिस की छवि कई बार डर और अनुशासन से जुड़ी होती है। हालाँकि, समय-समय पर ऐसे असाधारण उदाहरण सामने आते हैं जो पुलिस के मानवीय और संवेदनशील पक्ष को उजागर करते हैं। हाल ही में, मुंबई के अंबरनाथ शहर से एक ऐसी ही हृदयस्पर्शी घटना सामने आई है, जिसने न केवल एक युवा छात्रा के भविष्य को संवारा, बल्कि समाज को यह भी दिखाया कि खाकी के पीछे भी एक सहृदय व्यक्ति का दिल धड़कता है। इस…
लेखक: ललित गर्गअमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था को झकझोर रही थी। तेल बाजारों में भारी उथल-पुथल थी, निवेशकों में घबराहट बढ़ रही थी और वैश्विक मंदी की आशंकाएं गहराने लगी थीं। ऐसे में युद्धविराम ने विश्व को तत्काल राहत तो दी है, लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या…
लेखक: देवानंद सिंह उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश के एक न्यायिक अधिकारी की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है, जिसमें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद के लिए उनसे कनिष्ठ अधिकारियों की सिफारिश किए जाने पर सवाल उठाया गया था। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह कॉलेजियम व्यवस्था की कार्यवाही को लेकर कोई नया “भानुमति का पिटारा” नहीं खोलना चाहता। यह टिप्पणी केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़ी संवेदनशील व्यवस्था की प्रकृति और उसकी सीमाओं को भी रेखांकित करती है। यह फैसला न्यायिक स्वतंत्रता, मर्यादा और…
लेखक: देवानंद सिंह देश में कानून व्यवस्था बनाए रखना किसी भी सभ्य समाज की आधारशिला होती है। हालांकि, हाल के वर्षों में अपराध नियंत्रण के नाम पर होने वाले पुलिस एनकाउंटर लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। विशेषकर, बिहार में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर ‘एनकाउंटर की राजनीति’ और न्यायिक प्रक्रिया के बीच के तनाव को उजागर कर दिया है। यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली, सरकार की जवाबदेही और जनता के भरोसे से जुड़ा एक गहरा सवाल है। क्या अपराध से निपटने का सही तरीका अदालती प्रक्रिया है या ऐसी त्वरित…
लेखक: देवानंद सिंह बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर ने अब एक सामान्य पुलिस कार्रवाई से आगे बढ़कर राष्ट्रीय बहस का रूप ले लिया है। जिस घटना को पुलिस अपनी आधिकारिक व्याख्या में जवाबी कार्रवाई बता रही है, उसी घटना को लेकर मृतक के परिजन, स्थानीय ग्रामीण, सामाजिक संगठन और विभिन्न राजनीतिक दल गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक एक ही चर्चा है क्या इस मामले में पूरी सच्चाई सामने आई है और क्या निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है? भारतीय लोकतंत्र में किसी भी पुलिस मुठभेड़ की वैधता केवल सरकारी…
