लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) देश में मेडिकल शिक्षा का प्रवेश द्वार है, और इसकी अखंडता छात्रों के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल ही में बिहार के लखीसराय में हुई NEET UG पुनर्परीक्षा में एक बड़े NEET UG पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ है, जिसने पूरे देश में शिक्षा जगत को हिला दिया है। इस मामले में पुलिस ने 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे छात्र, डमी अभ्यर्थी और बायोमेट्रिक सत्यापन कर्मी शामिल हैं। यह घटना देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है और यह दर्शाती है कि कैसे संगठित गिरोह शिक्षा प्रणाली को दूषित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस खुलासे ने न केवल परीक्षा प्रणाली में व्याप्त खामियों को उजागर किया है, बल्कि उन मेहनती छात्रों के मनोबल को भी प्रभावित किया है जो ईमानदारी से अपनी परीक्षा देते हैं और NEET परीक्षा में सफलता के लिए दिन-रात एक करते हैं।
भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली की खबरें समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में इस तरह का संगठित NEET UG पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा सामने आना बेहद चिंताजनक है। यह न केवल लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि देश की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी एक बड़ा धब्बा है। ऐसे मामलों में शामिल व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई करना और परीक्षा प्रक्रियाओं को और अधिक मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि इसके तार कई राज्यों में फैले हुए एक बड़े नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।
NEET UG पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा: जांच का विस्तृत विवरण
लखीसराय। बिहार के लखीसराय में आयोजित NEET UG पुनर्परीक्षा 2026 के दौरान बड़े परीक्षा घोटाले का खुलासा हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों, फर्जी परीक्षार्थियों, मूल अभ्यर्थियों, सहयोगियों तथा बायोमेट्रिक सत्यापन कर्मियों समेत 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में फर्जी आधार कार्ड, डमी कैंडिडेट और बायोमेट्रिक सत्यापन में कथित मिलीभगत का संगठित नेटवर्क सामने आया है।
एसपी प्रेरणा कुमार ने बताया कि 21 जून को हुई पुनर्परीक्षा के दौरान केंद्रीय विद्यालय, केआरके उच्च विद्यालय और उच्च विद्यालय हसनपुर समेत कई परीक्षा केंद्रों पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद संयुक्त जांच की गई। जांच में पता चला कि कई लोग वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दे रहे थे।
पुलिस के अनुसार डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाने के लिए फर्जी आधार कार्ड बनाए गए थे और बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में भी कुछ कर्मियों की कथित भूमिका सामने आई है। गिरफ्तार आरोपियों में बिहार, झारखंड, दिल्ली और राजस्थान के कई मेडिकल छात्र शामिल हैं।
मामले में मूल परीक्षार्थियों और सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं, जांच के दौरान 18 बायोमेट्रिक सत्यापन कर्मियों की कथित संलिप्तता सामने आने पर उन्हें भी हिरासत में लिया गया है।
पुलिस का मानना है कि यह सिर्फ प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन) का मामला नहीं, बल्कि परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में अंदरूनी मिलीभगत से जुड़े बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। प्रारंभिक जांच में इसके तार बिहार, झारखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
इस संबंध में किउल थाना कांड संख्या 64/26 तथा कवैया थाना कांड संख्या 244/26 और 245/26 दर्ज कर जांच तेज कर दी गई है। पुलिस सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी है।
NEET फर्जीवाड़ा एक नजर में: मुख्य तथ्य
- कुल गिरफ्तार: 30
- डमी अभ्यर्थी: 9
- बायोमेट्रिक कर्मी: 18
- मूल अभ्यर्थी: 1
- कथित मास्टरमाइंड: 1 (अर्पित राज)
- डील की रकम: 10 लाख से 40 लाख रुपये तक
- मुख्य केंद्र: केंद्रीय विद्यालय, केआरके हाई स्कूल, हसनपुर हाई स्कूल (लखीसराय)
- फरार आरोपी: रविशंकर कुमार (विम्स पावापुरी का छात्र)
- जांच का दायरा: बिहार, झारखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक
एडीजी सुधांशु कुमार का बयान
“तीन परीक्षा केंद्रों से 9 डमी अभ्यर्थियों को पकड़ा गया है। मामले में बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है।”
इस NEET UG पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा के खुलासे से यह स्पष्ट है कि परीक्षा सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए कई स्तरों पर मिलीभगत की गई थी। फर्जी आधार कार्ड का उपयोग, डमी उम्मीदवारों की भूमिका, और बायोमेट्रिक सत्यापन कर्मियों की संलिप्तता यह बताती है कि यह एक सुनियोजित अपराध था। ऐसे संगठित गिरोहों का पर्दाफाश करना और उन्हें जड़ से खत्म करना बेहद जरूरी है। सरकार और संबंधित प्राधिकारियों को न केवल अपराधियों को दंडित करना चाहिए, बल्कि भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी को रोकने के लिए कठोर उपाय भी करने चाहिए। इसमें बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रियाओं को मजबूत करना, परीक्षा केंद्रों पर निगरानी बढ़ाना और तकनीकी सुरक्षा उपायों को उन्नत करना शामिल हो सकता है। [INTERNAL_LINK_HOLDER] यह सुनिश्चित करना सभी हितधारकों की जिम्मेदारी है कि छात्रों को एक निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली मिले।
इस प्रकार के फर्जीवाड़े से छात्रों में निराशा फैलती है और शिक्षा प्रणाली पर से उनका विश्वास उठ सकता है। अधिकारियों को इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए सभी दोषियों को सजा दिलानी चाहिए और परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। यह घटना देश भर में आयोजित होने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक चेतावनी है, जिसमें सुरक्षा उपायों की नियमित समीक्षा और सुधार की आवश्यकता है। एक मजबूत और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली ही देश के भविष्य को सुरक्षित कर सकती है।

