यूसीएल में भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप, आदिवासी नेता बोले – नहीं सुधरा प्रबंधन तो होगा आंदोलन
राष्ट्र संवाद संवाददाता
यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीएल) में लगातार हो रहे भ्रष्टाचार और स्थानीय लोगों की उपेक्षा को लेकर आदिवासी नेता अब मुखर हो गए हैं। झारखंड आंदोलनकारी रसिया क्लब और सेंगाल अभियान के सदस्य सुदाम सोरेन ने यूसीएल के सीएमडी के पीए सुरोजित दास पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे बीते 20 वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए हैं, और उन पर बार-बार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, फिर भी अब तक उन्हें हटाया नहीं गया है।

सुदाम सोरेन ने चेतावनी दी कि अगर यूसीएल प्रबंधन के खिलाफ जल्द कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो आदिवासी समुदाय आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि यूसीएल एक संवेदनशील परमाणु प्रतिष्ठान होने के बावजूद स्थानीय आदिवासी और विस्थापित समुदाय की लगातार अनदेखी कर रहा है। कार्यालय स्तर से लेकर भर्ती प्रक्रिया तक में गड़बड़ियां और बाहरी हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है। स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं, जबकि बाहरी लोगों को फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी दी जा रही है।

रेडिएशन का खतरा, सीएसआर में लापरवाही
सोरेन ने आरोप लगाया कि नरवा और तुरामडीह खदानों से लाए जा रहे यूरेनियम अयस्क को बिना ढके ट्रांसपोर्ट किया जा रहा है, जिससे रास्ते में अयस्क गिरता है और बरसात में खेत व नदियों में फैलकर प्रदूषण फैला रहा है। इससे लोगों की स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं।

उन्होंने सीएसआर योजनाओं को लेकर भी यूसीएल प्रबंधन को घेरा। आरोप लगाया कि न तो मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई गई और न ही टेलिंग पॉन्ड प्रभावितों का पुनर्वास हुआ है। झरिया और राजदोहा जैसे गांवों में कोई विकास कार्य नहीं हुआ है, और रेडिएशन से बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।

पीए के परिवार पर भी घोटाले का आरोप सुदाम सोरेन ने आरोप लगाया कि सुरोजित दास के भाई गोपीनाथ दास पर ₹56 लाख के घोटाले का मामला है। इसके साथ ही उन्होंने अपने कई परिजनों को विस्थापित दिखाकर यूसीएल में नौकरी दिलाई है, जो नीतिगत भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण है।

